तमिलनाडु की सत्ता का गेम ऑफ थ्रोन्स : विजय के सीएम बनने से पहले सीता हरण का ड्रामा
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तमिलनाडु की राजनीति 8 मई 2026 की रात एक ऐसे मोड़ पर आ गई है, जिसे किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं कहा जा सकता। थलापति विजय की पार्टी तमिळगा वेट्री कज़गम (TVK) ने 108 सीटों के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया, लेकिन शपथ ग्रहण से ठीक पहले यह जीत विवादों के भंवर में फंस गई है।

रात के अंधेरे में राजनीतिक हलचल

9 मई की सुबह 11 बजे होने वाले शपथ ग्रहण पर ग्रहण तब लगा जब एएमएमके (AMMK) महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने आधी रात को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के दरबार में दस्तक दी। दिनाकरन ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी के मन्नारगुड़ी से विधायक एस. कामराज का अपहरण कर लिया गया है। उन्होंने TVK पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप मढ़ते हुए इसे लोकतंत्र का काला अध्याय करार दिया।

विधायक कामराज का रहस्यमयी ढंग से लापता होना

दिनाकरन का दावा है कि कामराज का फोन बंद है और उनसे संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। उन्होंने कहा, हम कामराज को पांडिचेरी भेज रहे थे ताकि वे एडप्पाडी पलानीस्वामी (EPS) के समर्थन में पत्र दे सकें, लेकिन अचानक वे गायब हो गए। यह चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि सीधे तौर पर विधायकों की चोरी है। दिनाकरन ने यह भी साफ कर दिया कि यदि कामराज TVK का समर्थन भी करते हैं, तो भी वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे क्योंकि यह पूरी तरह से फर्जीवाड़ा है।

राज्यपाल के सामने EPS के दावे

दिनाकरन ने राज्यपाल को एक पत्र सौंपा, जिसमें दावा किया गया है कि एडप्पाडी पलानीस्वामी (EPS) के नेतृत्व वाली AIADMK के पास 120 विधायकों का समर्थन है। उन्होंने राज्यपाल से मांग की कि वे TVK को आमंत्रित करने के बजाय EPS को सरकार गठन का मौका दें। यह कदम सीधे तौर पर थलापति विजय की सीएम बनने की राह को रोकने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

क्या विजय की शुद्ध राजनीति बेनकाब हो गई?

थलपति विजय ने इस चुनाव में अच्छी राजनीति का वादा किया था, लेकिन सत्ता के गलियारों में जो खेल शुरू हुआ है, उसने उनकी छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि TVK ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि वे न तो किसी रिसॉर्ट पॉलिटिक्स में शामिल हैं और न ही हॉर्स-ट्रेडिंग में। लेकिन सोशल मीडिया पर चल रही खबरें कि कामराज जल्द ही TVK में शामिल हो सकते हैं, इस सफाई को कमजोर बना रही हैं।

तमिलनाडु का अनिश्चित भविष्य

वर्तमान स्थिति यह है कि विजय के पास 108 सीटें हैं और वे कांग्रेस, CPI, CPI(M) व VCK के समर्थन से बहुमत के बेहद करीब हैं। वहीं, VCK की डिप्टी सीएम पद की मांग और IUML का यू-टर्न विजय के लिए पहले से ही सिरदर्द बना हुआ था, और अब दिनाकरन के इस मिडनाइट ड्रामा ने तमिलनाडु में पोस्ट-पोल गठबंधन के गणित को पूरी तरह उलझा दिया है।

क्या विजय तय समय पर शपथ ले पाएंगे, या यह सीता हरण तमिलनाडु में फिर से विधानसभा चुनाव की पटकथा लिखेगा? राज्य की जनता अब राज्यपाल के अगले कदम का इंतजार कर रही है।

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