बंगाल में ऐतिहासिक बदलाव: सुवेंदु अधिकारी होंगे मुख्यमंत्री, रूपा गांगुली बनेंगी डिप्टी CM
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक नए युग का सूत्रपात हुआ है। 2026 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रचंड बहुमत (207 सीटें) हासिल कर ममता बनर्जी के दशकों पुराने गढ़ को ढहा दिया है। अब राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है।

सुवेंदु अधिकारी संभालेंगे कमान भाजपा विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री चुना गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने उनके नाम पर मुहर लगा दी है। सूत्रों के अनुसार, सुवेंदु अधिकारी के पास मुख्यमंत्री पद के साथ-साथ गृह मंत्रालय की भी अहम जिम्मेदारी होगी।

दो डिप्टी CM और नया मंत्रिमंडल राज्य में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भाजपा दो उप-मुख्यमंत्री (डिप्टी CM) नियुक्त करेगी। इनमें से एक नाम रूपा गांगुली का लगभग तय है, जो महिला नेतृत्व और सांस्कृतिक पहचान का चेहरा होंगी। दूसरे डिप्टी CM के रूप में दार्जिलिंग के किसी वरिष्ठ विधायक को मौका दिए जाने की चर्चा है।

शपथ ग्रहण: 9 मई का दिन होगा ऐतिहासिक अगले मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। इस भव्य शपथ समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत NDA के कई शीर्ष नेता शामिल होंगे।

कैबिनेट में इन चेहरों की हो सकती है एंट्री सुवेंदु अधिकारी की कैबिनेट में अनुभवी नेताओं और पेशेवरों का मिश्रण देखने को मिलेगा। चर्चा है कि दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निशिथ प्रमाणिक, तपस राय और स्वपन दासगुप्ता को कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके अलावा, भाजपा ने इस बार गवर्नेंस पर ध्यान केंद्रित करते हुए डॉ. राजेश कुमार, शंकर घोष और अशोक डिंडा जैसे पेशेवर चेहरों को भी नई कैबिनेट में जगह दी है।

कैसे ढहा ‘दीदी’ का किला? BJP की इस जीत को सोशल इंजीनियरिंग की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। पार्टी ने केवल राजनीतिक चेहरों पर दांव न लगाकर शिक्षकों, वकीलों और डॉक्टरों जैसे बुद्धिजीवियों को मैदान में उतारा, जिससे मध्यम वर्ग का बड़ा समर्थन भाजपा को मिला। TMC, जो 294 में से महज 80 सीटों पर सिमट गई है, के लिए यह एक बड़ा झटका है।

संवैधानिक गतिरोध और भविष्य की चुनौती राज्यपाल आर.एन. रवि ने विधानसभा भंग करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुरुआत में इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद राज्यपाल ने अपने संवैधानिक विशेषाधिकार का उपयोग किया। अब नजरें 9 मई पर हैं, जब बंगाल में नई सरकार कार्यभार संभालेगी और केंद्र-राज्य के रिश्तों की एक नई इबारत लिखी जाएगी।

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