झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले से एक अत्यंत दुखद और शर्मनाक मामला सामने आया है। राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में बिजली गुल होने पर, मोबाइल टॉर्च की रोशनी में डिलीवरी कराने की कोशिश की गई, जिसके परिणामस्वरूप मां और उसके नवजात बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई।
क्या है मामला? मृतक महिला की पहचान हाथीसिरिंग गांव की रहने वाली बिनीता बानरा के रूप में हुई है, जो खुद एक स्वास्थ्य सहिया थी। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के दौरान अस्पताल में अचानक बिजली चली गई। अस्पताल में बैकअप का कोई इंतजाम नहीं था, जिसके चलते डॉक्टरों ने मोबाइल की रोशनी में डिलीवरी कराने का जोखिम उठाया, जो अंततः जानलेवा साबित हुआ।
व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल प्रशासनिक जांच में यह बात सामने आई है कि अस्पताल में पावर बैकअप के नाम पर सोलर सिस्टम, इन्वर्टर और जनरेटर जैसी सुविधाएं मौजूद थीं, लेकिन वे पूरी तरह निष्क्रिय थीं। पूर्व चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अर्जुन सोरेन ने स्वीकार किया कि सोलर बैटरी चार्ज नहीं थी और जनरेटर खराब पड़ा था।
प्रशासन की सख्ती और कार्रवाई इस घटना ने जिला प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। उपायुक्त के निर्देश पर एसडीओ अभिनव प्रकाश के नेतृत्व में एक जांच कमेटी गठित की गई है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी चिकित्सक को तुरंत सस्पेंड करने के निर्देश दिए हैं।
सियासी गलियारों में हड़कंप इस घटना ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि झारखंड का स्वास्थ्य विभाग खुद अस्वस्थ हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज के अभाव में मौतें होना अब एक सामान्य बात बन गई है।
जांच का दायरा जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि सालों से जनरेटर और अन्य विद्युत उपकरण खराब होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने इन्हें ठीक क्यों नहीं कराया। एसडीओ ने स्पष्ट किया है कि ऐसी आपराधिक लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पीड़ित परिवार अब दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
राजनगर, सरायकेला के सरकारी अस्पताल में मोबाइल की रोशनी में प्रसव कराने की कोशिश के दौरान माँ और नवजात शिशु दोनों की मौत की खबर बेहद दर्दनाक और शर्मनाक है।
— BJP JHARKHAND (@BJP4Jharkhand) May 4, 2026
यह सिर्फ दो जिंदगियों का नुकसान नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की भयावह सच्चाई को उजागर करता है। जब अस्पतालों में बिजली,… pic.twitter.com/y67vAvbRyv
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