प्रोजेक्ट फ्रीडम: क्या ट्रंप का नया दांव ईरान के सामने साबित होगा डेडली लॉक ?
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वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के खिलाफ प्रोजेक्ट फ्रीडम लॉन्च करने का ऐलान किया है। इस घोषणा के साथ ही मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने इसे सिरे से खारिज करते हुए डेडलॉक प्रोजेक्ट करार दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप इस मिशन को जितना आसान बता रहे हैं, जमीनी हकीकत उससे कहीं ज्यादा जटिल है।

क्या है ट्रंप का प्रोजेक्ट फ्रीडम? 3 मई की रात ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में प्रोजेक्ट फ्रीडम चलाएगी। ट्रंप का दावा है कि इसके जरिए होर्मुज में फंसे 1500 से अधिक जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा। इसके लिए अमेरिकी डिस्ट्रॉयर जहाजों को तैनात करने की योजना थी, जिससे एक बार फिर सीधे सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है।

सेना और सरकार के बयानों में विरोधाभास दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप के ऐलान के ठीक बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अपने रुख को साफ कर दिया। CENTCOM ने स्पष्ट किया कि वे होर्मुज में कोई सैन्य कार्रवाई नहीं करेंगे और जहाजों को ओमान के रास्ते निकलने की सलाह दी है। यह विरोधाभास दर्शाता है कि प्रोजेक्ट फ्रीडम की सफलता पर खुद अमेरिकी सेना को भी संदेह है।

होर्मुज की घेराबंदी और नाकामी का डर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान ने पिछले 68 दिनों से नाकेबंदी कर रखी है। हाल ही में एक दक्षिण कोरियाई टैंकर पर ईरान के मिसाइल हमले ने यह साबित कर दिया है कि ईरान की मर्जी के बिना वहां से निकलना नामुमकिन है। ओमान के रास्ते को सुरक्षित बताने वाले अमेरिकी सुझावों को भी ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों ने बेअसर कर दिया है।

सहयोगी देशों की चुप्पी और आर्थिक बोझ ट्रंप के पास तीन ही रास्ते बचे हैं: ईरान की शर्तें मानना, सहयोगियों की मदद लेना, या सीधे सैन्य हस्तक्षेप। हालांकि, जापान, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देश बार-बार मदद की अपील के बावजूद इस विवाद से दूरी बनाए हुए हैं। अमेरिका पहले ही इस युद्ध में 25 अरब डॉलर से अधिक गंवा चुका है, और महंगाई से जूझ रही अमेरिकी जनता के बीच एक और महंगा युद्ध शुरू करना ट्रंप के लिए राजनीतिक आत्मघाती साबित हो सकता है।

राजनीतिक दांव और मिड-टर्म इलेक्शन विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप इस युद्ध का समाधान जल्द से जल्द चाहते हैं क्योंकि इसका सीधा असर अमेरिका में आगामी मिड-टर्म इलेक्शन पर पड़ रहा है। यदि उनकी पार्टी चुनाव हारती है, तो ट्रंप के लिए भविष्य के फैसले लेना मुश्किल हो जाएगा। ईरान के अड़ियल रवैये और अमेरिका की गिरती आर्थिक ताकत के बीच प्रोजेक्ट फ्रीडम एक ऐसा मिशन बन गया है, जो ट्रंप की साख और अमेरिका की सैन्य रणनीति दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है।

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