ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तानी नेता ने कबूला सच, सेना देती है आतंकियों को गार्ड ऑफ ऑनर
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भारत के ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी से ठीक पहले पाकिस्तान का दोहरा चेहरा दुनिया के सामने बेनकाब हो गया है। पाकिस्तान नजरियाती पार्टी (PNP) के प्रमुख शाहीर सियालवी ने एक सनसनीखेज खुलासे में स्वीकार किया है कि पाकिस्तानी सेना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोषित आतंकवादियों—हाफिज सईद और मसूद अजहर—के गुर्गों को न केवल संरक्षण देती है, बल्कि उनके अंतिम संस्कार में सैन्य सम्मान भी प्रदान करती है।

सेना ने दिया आतंकवादियों को कंधा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में शाहीर सियालवी ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मारे गए आतंकवादियों का अंतिम संस्कार किसी आम व्यक्ति ने नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों ने करवाया था।

सियालवी के अनुसार, मारे गए आतंकवादियों के शवों को सेना की वर्दी पहने जवानों ने अपने कंधों पर उठाया था। यह पूरी कवायद दुनिया को यह दिखाने के लिए की गई थी कि ये आतंकवादी नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानी थे। यह बयान पाकिस्तान के उस पुराने झूठ की पोल खोलता है, जिसमें वह इन आतंकी समूहों को नॉन-स्टेट एक्टर्स बताकर पल्ला झाड़ता आया है।

कौन हैं शाहीर सियालवी? शाहीर सियालवी पाकिस्तानी सेना के ब्रिगेडियर हैदर मलिक के बेटे हैं। उनका यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे सेना के अंदरूनी तंत्र से वाकिफ हैं। सियालवी ने यह भी स्वीकार किया कि भारत के हवाई हमलों ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के गढ़ माने जाने वाले मुरीदके और बहावलपुर को भारी नुकसान पहुंचाया था।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि, अगर हमने यह जंग लड़ी है, तो वह हाफिज सईद और मौलाना मसूद अजहर की सुरक्षा के लिए लड़ी है। सियालवी ने यह भी माना कि वे खुद लश्कर के संस्थापक हाफिज सईद से मिल चुके हैं।

क्या था ऑपरेशन सिंदूर ? भारत ने पिछले साल 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की थी। यह जवाबी कार्रवाई 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस भीषण आतंकी हमले के बाद की गई थी, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हो गई थी।

भारतीय सेना और वायुसेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में मौजूद आतंकी बुनियादी ढांचे को अपना निशाना बनाया था। 7 मई से 10 मई तक चले इस सैन्य टकराव के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव और तनाव कम करने की शर्तों पर सहमति बनी थी। सियालवी का यह कबूलनामा अब पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर और अधिक अलग-थलग करने के लिए पर्याप्त है।

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