पश्चिम बंगाल मतगणना: 293 केंद्रों का अभेद्य किला , सुरक्षा के लिए तैनात अर्धसैनिक बलों की 200 कंपनियां
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों का इंतजार अब अपने अंतिम चरण में है। जनता का फैसला ईवीएम में कैद है और अब सबकी निगाहें मतगणना केंद्रों पर टिकी हैं। चुनाव आयोग ने इस महाकुंभ के लिए सुरक्षा और व्यवस्था का ऐसा ताना-बाना बुना है जिसे भेदना नामुमकिन होगा।

293 केंद्र और 459 हॉल: निष्पक्षता के पुख्ता इंतजाम

राज्य भर में मतगणना के लिए कुल 293 केंद्र बनाए गए हैं, जो 459 मतगणना हॉल में तब्दील किए गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल के अनुसार, इनमें 129 एकल और 163 दोहरे हॉल शामिल हैं। मेटियाब्रुज, सप्तग्राम और बिजपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मतगणना के 10-10 दौर होंगे। तकनीकी व्यवधान या बिजली कटौती जैसी समस्याओं से निपटने के लिए विशेष बैकअप व्यवस्था भी की गई है।

त्रि-स्तरीय सुरक्षा का अभेद्य घेरा

सुरक्षा को लेकर आयोग ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। मतगणना स्थल पर राज्य पुलिस, राज्य सशस्त्र पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) का तीन-स्तरीय सुरक्षा घेरा होगा। केंद्र के बाहर CAPF की 200 कंपनियां तैनात की गई हैं। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि सुरक्षा घेरे का उल्लंघन करने वालों से केंद्रीय बल सख्ती से निपटेंगे।

एजेंटों और अधिकारियों के लिए कड़े नियम

पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर हॉल में एक पर्यवेक्षक तैनात किया गया है। नियम इतने सख्त हैं कि किसी भी एजेंट को मतगणना पूरी होने से पहले परिसर छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। आपात स्थिति में बाहर जाने के लिए रिटर्निंग ऑफिसर (RO) की लिखित अनुमति अनिवार्य है। डेटा एंट्री में किसी भी मानवीय भूल से बचने के लिए हर राउंड के बाद ही आंकड़े सिस्टम में दर्ज किए जाएंगे।

विजय जुलूस पर पाबंदी और धारा 163 का पहरा

चुनाव आयोग ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य भर में धारा 163 लागू कर दी है, जिससे किसी भी तरह की भीड़ जुटने पर रोक रहेगी। सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि जीत के बाद किसी भी तरह के विजय जुलूस पर पूर्ण प्रतिबंध है। यदि किसी को कार्यक्रम करना है, तो उसे स्थानीय पुलिस से विशेष अनुमति लेनी होगी।

लापरवाही पर सख्त एक्शन

आयोग ने केवल सुरक्षा पर ही ध्यान नहीं दिया है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही भी तय की है। चुनाव के दौरान गड़बड़ी की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए 15 बूथों पर पुनर्मतदान कराया गया है। साथ ही, ड्यूटी में कोताही बरतने वाले तीन पीठासीन अधिकारियों और एक बीएलओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ममता बनर्जी चौथी बार सत्ता की कुर्सी संभालेंगी या बीजेपी इतिहास रचते हुए पहली बार बंगाल में जीत का परचम लहराएगी। कल आने वाले नतीजे तय करेंगे कि बंगाल की राजनीति किस दिशा में मुड़ेगी।

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