रूस की आर्थिक नाकेबंदी: यूक्रेन के भीषण ड्रोन हमलों से दहले बाल्टिक और काला सागर बंदरगाह
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रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब एक नए और भयावह चरण में प्रवेश कर चुका है। अब यह जंग केवल सीमावर्ती मोर्चों तक सीमित नहीं रही, बल्कि रूस की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले ऊर्जा केंद्रों को सीधे तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। रविवार, 3 मई 2026 को यूक्रेन ने रूस के बाल्टिक और काला सागर स्थित बंदरगाहों पर अब तक के सबसे आक्रामक ड्रोन ऑपरेशन को अंजाम दिया।

प्रिमोर्स्क बंदरगाह पर भीषण हमला यूक्रेनी सेना ने बाल्टिक सागर स्थित रूस के प्रमुख तेल निर्यातक केंद्र प्रिमोर्स्क को अपना लक्ष्य बनाया। यह बंदरगाह रूस के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ से प्रतिदिन लगभग 10 लाख बैरल तेल का निर्यात किया जाता है। लेनिनग्राद के गवर्नर अलेक्जेंडर ड्रोज़्डेंको ने पुष्टि की कि हमले के बाद पूरे इलाके में भीषण आग लग गई थी, जिसे कड़ी मशक्कत के बाद काबू किया गया। गनीमत रही कि इस हमले में कोई तेल रिसाव नहीं हुआ, जिससे एक बड़ी पर्यावरणीय त्रासदी टल गई।

बढ़ती मारक क्षमता और शैडो फ्लीट पर वार प्रिमोर्स्क की सुरक्षा में तैनात रूसी रक्षा प्रणालियों ने रात भर चले ऑपरेशन में 60 से अधिक ड्रोन मार गिराने का दावा किया है। हालांकि, हमलों की बढ़ती संख्या यह स्पष्ट करती है कि यूक्रेन की लंबी दूरी की मारक क्षमता में भारी इजाफा हुआ है।

वहीं, राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने काला सागर के नोवोरोसिस्क बंदरगाह पर रूस की शैडो फ्लीट (गुप्त तेल टैंकरों का बेड़ा) पर हमले की घोषणा की है। जेलेंस्की ने कहा, हमारी सेना रूसी शैडो फ्लीट पर प्रतिबंधों को अपनी मिसाइलों और ड्रोनों से लागू कर रही है। जिन टैंकरों का उपयोग तेल परिवहन के लिए किया जा रहा था, वे अब अक्षम हो चुके हैं।

दोनों देशों में तबाही का मंजर यूक्रेन और रूस के बीच पिछले चार वर्षों से जारी इस युद्ध में अब मानवीय क्षति का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। हालिया हमलों में स्मोलेंस्क में एक अपार्टमेंट पर हमले से तीन लोग घायल हुए, जबकि मास्को के पास एक गांव में 77 वर्षीय बुजुर्ग की जान चली गई।

दूसरी ओर, यूक्रेन भी रूसी बमबारी से बुरी तरह झुलस रहा है। रूस ने पिछले 24 घंटों में 268 ड्रोनों और बैलिस्टिक मिसाइलों से ओडेसा के निर्यात टर्मिनलों पर हमला किया है। इस हमले में बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और दो लोगों की मौत हो गई है। खेरसॉन क्षेत्र में भी निरंतर रूसी गोलाबारी से आम नागरिकों की जान जा रही है।

यह ताजा घटनाक्रम दर्शाता है कि दोनों देश अब एक-दूसरे की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह पंगु बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं, जिसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ना तय है।

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