कुवैत का कैंप ब्यूहरिंग अब एक खंडहर कभी अमेरिकी सैन्य शक्ति का प्रतीक रहा कुवैत का कैंप ब्यूहरिंग अब लगभग खाली और पूरी तरह तबाह हो चुका है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका का यह सबसे बड़ा सैन्य केंद्र कभी चहल-पहल से भरा होता था, लेकिन हफ्तों तक चले ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों ने इसकी तस्वीर बदल दी है। यह केवल एक ठिकाने की कहानी नहीं है; मध्य पूर्व में फैले अमेरिका के कम से कम 16 सैन्य अड्डों को ईरान ने अपने सटीक हमलों से निशाना बनाया है।
अभेद्य किलों का ढहना अमेरिकी सैन्य इतिहास में यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर उनके ठिकानों को नुकसान पहुँचाया गया है। एक अमेरिकी सूत्र के अनुसार, उन्होंने इससे पहले सैन्य ठिकानों पर इतनी भीषण तबाही कभी नहीं देखी। ईरान के हमलों की गति और सटीकता ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिका के तथाकथित अभेद्य किले अब आसानी से भेदने योग्य हो गए हैं।
महंगी तकनीक और रडार सिस्टम हुए खाक ईरान ने विशेष रूप से उन उपकरणों को निशाना बनाया जो अमेरिकी रक्षा प्रणाली की आंख और कान थे। इसमें 500 मिलियन डॉलर की कीमत वाला बोइंग ई-3 सेंट्री विमान और डेटा ट्रांसमिशन के लिए जरूरी रैडोम स्ट्रक्चर शामिल हैं। सबसे बड़ी चोट रडार सिस्टम पर पड़ी है। पेंटागन के जानकारों का मानना है कि ये रडार अमेरिका के सबसे सीमित और महंगे संसाधन हैं, जिन्हें दोबारा बनाना बेहद कठिन है।
चीन की गुप्त आंख से बदली जंग की तस्वीर ईरान की इस कामयाबी के पीछे चीन का हाथ होने की बात सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने चीन का TEE-01B उपग्रह हासिल किया है। इससे ईरान अब हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें ले पा रहा है, जो अमेरिका की निगरानी क्षमता के समान है। यह पहली बार है जब अमेरिका अपने किसी ऐसे दुश्मन से लड़ रहा है जिसके पास सैटेलाइट के जरिए इतनी सटीक निगरानी की शक्ति है।
बदलते समीकरण: सहयोगी देशों का मोहभंग इस हमले ने खाड़ी के अरब देशों के बीच अमेरिका की छवि को हिलाकर रख दिया है। सऊदी अरब जैसे पुराने सहयोगियों को अब यह एहसास हो गया है कि अमेरिका के साथ सैन्य गठबंधन न तो अटूट है और न ही एकमात्र विकल्प। कतर के अल-उदैद एयरबेस—जो अमेरिकी वायु शक्ति का मुख्य केंद्र है—पर दो बार हुए हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर सवाल उठने लगे हैं।
अमेरिकी सेना अब होटलों में रहने को मजबूर हालांकि पेंटागन का कहना है कि उनकी युद्धक क्षमता बरकरार है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मध्य पूर्व में तैनात अधिकांश अमेरिकी सैनिकों को उनके मुख्य सैन्य ठिकानों से हटा लिया गया है। अब ये सैनिक अरब देशों के होटलों और अपार्टमेंट्स में छिपकर काम करने को मजबूर हैं। ईरान के हमलों ने न केवल अमेरिकी उपकरणों को नष्ट किया, बल्कि मध्य पूर्व में अमेरिका के दशकों पुराने दबदबे को भी एक बड़ा झटका दिया है।
New CNN Investigation:
— CNN International PR (@cnnipr) May 1, 2026
At least 16 American military sites have been damaged in Iranian strikes, making up the majority of US positions in the Middle East.
From CNN s @tamaraqiblawi and the Investigations team. pic.twitter.com/RoIHrI0Bhr
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