बुद्ध पूर्णिमा, जिसे वेसाक के नाम से भी जाना जाता है, गौतम बुद्ध के जीवन और उनकी अमर शिक्षाओं को समर्पित एक पवित्र उत्सव है। यह दिन केवल एक जयंती नहीं, बल्कि मानवता के लिए शांति, अहिंसा और आत्म-साक्षात्कार का मार्ग प्रशस्त करने वाला अवसर है।
यह दिन गौतम बुद्ध के जीवन की तीन महत्वपूर्ण घटनाओं का संगम है: उनका जन्म, उन्हें प्राप्त हुआ ज्ञान (निर्वाण) और उनका महापरिनिर्वाण। वैशाख माह की पूर्णिमा को ही राजकुमार सिद्धार्थ का जन्म लुम्बिनी में हुआ था, उन्हें बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे सत्य का ज्ञान मिला और इसी दिन उन्होंने देह त्याग कर मोक्ष प्राप्त किया।
बुद्ध पूर्णिमा 2026 के अवसर पर एक विशेष घटनाक्रम में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लेह के जिवत्सल में तथागत बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। यह ऐतिहासिक पल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 75 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ये पवित्र अवशेष लद्दाख पहुंचे हैं।
बुद्ध पूर्णिमा का वास्तविक सार भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने में है। उन्होंने चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग के माध्यम से दुखों से मुक्ति और शांति का संदेश दिया। उनकी शिक्षाएं आज भी दुनिया भर के लाखों लोगों को आत्म-नियंत्रण और करुणा का मार्ग दिखा रही हैं।
भारत, नेपाल, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में इसे अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। भक्त मठों में जाकर प्रार्थना करते हैं, धर्मग्रंथों का पाठ करते हैं और ध्यान लगाते हैं। मंदिरों को रोशनी से सजाया जाता है और दयालुता के कार्यों के रूप में ज़रूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान किए जाते हैं।
29 वर्ष की आयु में सत्य की खोज में राजसी जीवन त्यागने वाले सिद्धार्थ ने जीवन के दुखद पहलुओं—वृद्धावस्था, बीमारी और मृत्यु—को देखने के बाद सन्यास लिया। कठोर तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में वे सिद्धार्थ से बुद्ध (जागृत व्यक्ति) बने। उनका पूरा जीवन त्याग, ज्ञान और परोपकार की एक जीवंत गाथा है, जो आज भी मानवता का मार्गदर्शन कर रही है।
*#BuddhaPurnima
— All India Radio News (@airnewsalerts) May 1, 2026
Union Home Minister @AmitShah inaugurates the Sacred Holy Relics Exposition of Tathagata Buddha at Jivatsal in #Leh.
Extending wishes to the people of #Ladakh on Buddha Purnima, Mr Shah highlights that after 75 years, these sacred relics have come to #Ladakh.… pic.twitter.com/bOuI0UknVR
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