होर्मुज में ईरान की कमर टूटी: 5 अरब डॉलर का नुकसान, क्या ट्रंप की शह पर पाकिस्तान दे रहा लाइफलाइन ?
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तेहरान और वाशिंगटन के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त रणनीति रंग लाती दिख रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी नाकेबंदी ने ईरान की अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है।

5 अरब डॉलर का भारी नुकसान

अमेरिका की सख्ती के कारण ईरान को करीब 5 अरब डॉलर (लगभग 40 हजार करोड़ रुपये) के तेल राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है। अमेरिकी नौसेना ने ईरान के 40 से अधिक जहाजों को वापस लौटने पर मजबूर किया है।

वर्तमान में 31 तेल टैंकर, जिनमें करीब 53 मिलियन बैरल ईरानी तेल लदा है, खाड़ी में फंसे हुए हैं। इन टैंकरों का कुल मूल्य 4.8 अरब डॉलर आंका गया है। साथ ही, अमेरिका ने दो ईरानी जहाजों को अपने कब्जे में भी ले लिया है।

तेल भंडारण की समस्या और उत्पादन पर संकट

ईरान के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती तेल को स्टोर करने की है। तटों पर जगह न होने के कारण पुराने टैंकरों को ही फ्लोटिंग स्टोरेज के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नाकेबंदी जारी रही, तो ईरान को मजबूरन तेल उत्पादन रोकना पड़ेगा। यह उसकी पहले से जूझ रही अर्थव्यवस्था के लिए एक आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।

पाकिस्तान का डबल गेम और ट्रंप की चुप्पी

इस पूरे प्रकरण में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। समुद्री रास्ता बंद होने के बाद, पाकिस्तान ने ईरान के साथ 6 व्यापारिक कॉरिडोर खोल दिए हैं। यह जमीनी रास्ते ईरान के लिए एक जीवनरेखा की तरह काम कर रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि इस बारे में पूछे जाने पर डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्हें पाकिस्तान की इन गतिविधियों की पूरी जानकारी है। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तारीफ भी की।

जानकारों का मानना है कि ट्रंप की यह चुप्पी सोची-समझी हो सकती है। संभव है कि अमेरिका, पाकिस्तान के जरिए ईरान को एक सीमित वेंटिलेशन देकर उसे एक नई डील के लिए मजबूर करना चाहता हो।

चकमा दे रहा ईरान

अमेरिकी घेराबंदी से बचने के लिए ईरान भी नई रणनीतियां अपना रहा है। कई ईरानी टैंकर अब पाकिस्तान और भारत के तटों के करीब से होते हुए मलेशिया के मलक्का स्ट्रेट की ओर रुख कर रहे हैं, ताकि वहां से तेल को चीन तक पहुंचाया जा सके।

ईरान सिर्फ दबाव नहीं झेल रहा, बल्कि वह लगातार नए व्यापारिक गलियारे खोजकर अमेरिकी प्रतिबंधों को धता बताने की कोशिशों में जुटा है। यह साफ है कि होर्मुज में जारी रस्साकशी अब एक बड़े रणनीतिक खेल में बदल चुकी है।

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