ईरान की अमेरिका को दो टूक: न्यूक्लियर और होर्मुज पर तय की लक्ष्मण रेखा , क्या ट्रंप मानेंगे नया प्रपोजल?
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तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव चरम पर है। इसी बीच ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिसमें न्यूक्लियर और समुद्री रूट से जुड़े कड़े मापदंड तय किए गए हैं। क्या यह जंग रोकने की दिशा में कोई बड़ा कदम है या सिर्फ कूटनीतिक चाल?

रूस पहुंचे अराघची, पुतिन के साथ अहम बैठक

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची अपनी कूटनीतिक यात्रा के तहत अब रूस के सेंट पीटर्सबर्ग पहुंच चुके हैं। वहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से होनी है। इससे पहले अराघची ने पाकिस्तान और ओमान में सक्रिय कूटनीति की है। बताया जा रहा है कि रूस इस पूरे विवाद में एक सुरक्षा गारंटी (Security Guarantor) के रूप में भूमिका निभा सकता है।

ईरान का टू-स्टेज फॉर्मूला

ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को एक नया प्रस्ताव सौंपा है। इस प्रस्ताव को दो चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और अमेरिकी घेराबंदी को खत्म करने की बात है। ईरान का तर्क है कि न्यूक्लियर मुद्दों पर चर्चा तभी संभव है जब समुद्री रास्तों से प्रतिबंध हटेंगे। बदले में, ईरान युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने या लंबे युद्धविराम के लिए तैयार है।

ट्रंप की शर्त: दूत नहीं, सीधा कॉल करो

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख फिलहाल सख्त है। उन्होंने अपने दूतों (स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर) का पाकिस्तान दौरा रद्द कर ये साफ कर दिया है कि वे अभी किसी औपचारिक चर्चा के मूड में नहीं हैं। ट्रंप का कहना है कि ईरानी नेता सीधे उन्हें फोन कॉल कर सकते हैं। व्हाइट हाउस का मानना है कि ईरान को पहले 10 साल के लिए यूरेनियम संवर्धन बंद करना चाहिए और अपना स्टॉक बाहर भेजना चाहिए।

लक्ष्मण रेखा और ग्लोबल मार्केट पर असर

ईरान ने न्यूक्लियर प्रोग्राम और समुद्री रास्तों को लेकर अपनी लक्ष्मण रेखा खींच दी है। उनका कहना है कि बातचीत की शुरुआत व्यापारिक और समुद्री प्रतिबंधों को हटाने से होनी चाहिए, न कि मिसाइल प्रोग्राम को रोकने से। अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का सीधा असर ग्लोबल मार्केट पर पड़ रहा है, जिससे कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव जारी है।

क्या कोई डील संभव है?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका ईरान के इस नए ब्लूप्रिंट पर आगे बढ़ेगा या नहीं। जहां ईरान कूटनीतिक दबाव बना रहा है, वहीं ट्रंप अपनी शर्तों पर अड़े हैं। आने वाले दिनों में पुतिन के साथ अराघची की मुलाकात यह तय करेगी कि क्या यह तनाव किसी समझौते की ओर बढ़ेगा या गतिरोध और गहरा जाएगा।

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