केदारनाथ यात्रा: पिता की लाश के लिए बेटे की गुहार, डीएम ने दिया NOC का हवाला और खुद भर ली उड़ान!
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केदारनाथ यात्रा 2026 के पहले ही दिन एक ऐसी दुखद घटना सामने आई है, जिसने न केवल एक परिवार की खुशियां छीन लीं, बल्कि उत्तराखंड प्रशासन की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वडोदरा, गुजरात से आए 60 वर्षीय श्रद्धालु दिलीप भाई माली का केदारनाथ धाम पहुंचते ही हार्ट अटैक से निधन हो गया।

बेटे की गुहार और प्रशासन की उदासीनता

मृतक के बेटे हेमंत माली का आरोप है कि पिता की मौत के बाद वह घंटों तक उनके शव को नीचे ले जाने के लिए हेलीकॉप्टर की गुहार लगाता रहा। हेमंत का कहना है कि उन्होंने रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी (DM) विशाल मिश्रा से मदद मांगी, जिन्होंने DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) की NOC न होने का हवाला देकर हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने से साफ इनकार कर दिया।

हैरानी की बात तब हुई जब प्रशासनिक अनुमति न होने का बहाना बनाने वाले डीएम विशाल मिश्रा, उसी हेलीकॉप्टर में बैठकर अपनी टीम के साथ वहां से रवाना हो गए।

वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में हेमंत माली बिलखते हुए सवाल कर रहे हैं, अगर NOC नहीं थी, तो डीएम साहब कैसे उड़े? क्या अधिकारियों और आम श्रद्धालुओं के लिए नियम अलग-अलग हैं?

शव घंटों तक धूप में पड़ा रहा, जबकि परिवार मदद के लिए दर-दर भटकता रहा। इस घटना ने सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। वरिष्ठ पत्रकारों और आम नागरिकों ने डीएम के इस रवैये को अमानवीय और गैरजिम्मेदाराना करार दिया है।

क्या हैं सरकारी नियम और दोहरे मापदंड?

आधिकारिक तौर पर, हेलीकॉप्टर से शव ले जाने के लिए DGCA के कड़े नियम होते हैं, जिसमें डेथ सर्टिफिकेट, एम्बालिंग (शव संरक्षण) और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है। लेकिन सवाल यह है कि एक संवैधानिक पद पर बैठा अधिकारी, जिसे संकट के समय जनता की मदद करनी चाहिए, वह खुद सरकारी संसाधन का उपयोग कर रहा है जबकि एक मृत श्रद्धालु न्याय और सम्मान का मोहताज बना हुआ है।

कौन हैं डीएम विशाल मिश्रा?

विवादों के केंद्र में आए रुद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा 2018 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि (IIT कानपुर से एम.टेक) रखने वाले मिश्रा को जल प्रबंधन और इंफ्रास्ट्रक्चर का विशेषज्ञ माना जाता है। 13 फरवरी 2026 से ही वे रुद्रप्रयाग में तैनात हैं। हालांकि, अपने करियर में वे अब तक किसी बड़े विवाद से दूर रहे हैं, लेकिन केदारनाथ यात्रा के पहले ही दिन की इस घटना ने उनकी प्रशासनिक कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

आस्था बनाम व्यवस्था की जंग

केदारनाथ जैसी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाली यात्रा में स्वास्थ्य जोखिम हमेशा बने रहते हैं। प्रशासन हर साल बेहतर मेडिकल सुविधा और हेली सर्विस का दावा करता है। लेकिन एक मृतक को घंटों धूप में छोड़ना प्रशासन की तैयारियों की पोल खोलता है।

क्या हेलीकॉप्टर सेवाएं सिर्फ वीआईपी मूवमेंट के लिए हैं? क्या एक आम नागरिक की मर्यादा का कोई मूल्य नहीं? इन सवालों के जवाब अब उत्तराखंड प्रशासन को देने ही होंगे। फिलहाल, परिवार का दर्द और सोशल मीडिया पर उठ रही न्याय की मांग ने केदारनाथ यात्रा की व्यवस्था पर एक गहरा दाग लगा दिया है।

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