सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की बागेश्वर धाम प्रमुख पंडित धीरेंद्र शास्त्री के साथ हालिया मुलाकात ने देश में एक नई बहस छेड़ दी है। सोमवार को हुई यह मुलाकात, जो निजी बताई जा रही है, सोशल मीडिया पर आते ही आलोचनाओं का केंद्र बन गई है।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने इस मुलाकात पर कड़ा ऐतराज जताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा, मुझे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा है। भूषण ने धीरेंद्र शास्त्री को नफरत फैलाने वाला करार देते हुए सवाल उठाया कि एक पूर्व न्यायाधीश का ऐसे विवादित व्यक्ति के साथ सार्वजनिक रूप से दिखना न्यायपालिका की छवि पर क्या असर डालेगा।
आलोचकों का तर्क है कि यह मामला केवल एक निजी मुलाकात का नहीं है। पद पर बैठे या सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का सार्वजनिक आचरण संस्था की निष्पक्षता को प्रभावित करता है। कई कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि सर्वोच्च न्यायालय से जुड़े लोग विवादित धार्मिक हस्तियों के साथ मंच साझा करते हैं, तो आम जनता का न्यायपालिका पर से भरोसा डगमगा सकता है।
मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपनी दिव्य दरबार और चमत्कारी दावों को लेकर हमेशा चर्चा में रहते हैं। उनके बयानों पर अक्सर विवाद होता रहा है, जिसके चलते उन्हें लेकर समाज में दो स्पष्ट खेमे बने हुए हैं। यही कारण है कि उनके साथ किसी भी वीआईपी की मुलाकात संवेदनशील मानी जाती है।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया है। एक धड़े का मानना है कि न्यायाधीशों को भी अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार किसी से भी मिलने का पूरा अधिकार है। वहीं, दूसरा पक्ष इसे सार्वजनिक पद की मर्यादा और जुडिशियल कंडक्ट के खिलाफ मान रहा है।
यह विवाद एक बार फिर इस बहस को जन्म दे चुका है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की निजी और सार्वजनिक जिंदगी के बीच की सीमा रेखा कितनी धुंधली होनी चाहिए। फिलहाल, इस मुद्दे पर कानूनी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।
*Can’t believe my eyes! Former CJI Gavai with a hate spewing fraudman! What kind of message is he sending to the judiciary! Shocking! pic.twitter.com/13SKL3Ih4c
— Prashant Bhushan (@pbhushan1) April 22, 2026
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