अमेरिका-ईरान के बीच समझौते में फंसा पेंच: क्या मिडिल ईस्ट में शुरू होने वाला है महाविनाश?
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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से शांति और युद्ध के बीच की दूरी महज कुछ घंटों की रह गई है। 22 अप्रैल को सीजफायर की मियाद खत्म हो रही है, लेकिन अब तक दूसरे दौर की वार्ता को लेकर कोई ठोस रास्ता नहीं निकल पाया है।

ट्रंप की सख्त चेतावनी और सैन्य तैयारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दो टूक लहजे में चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि ईरान ने अच्छा समझौता नहीं किया, तो संघर्ष विराम को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह भी संकेत दिए हैं कि अमेरिकी सेना ईरान पर हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह बयान युद्ध के मुहाने पर खड़े दोनों देशों के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

इस्लामाबाद वार्ता: क्यों अटकी है गाड़ी? पाकिस्तान के इस्लामाबाद में वार्ता की पूरी तैयारियां हो चुकी हैं। शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर दोनों पक्षों के आने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन पेंच बातचीत की शर्तों पर फंसा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी शर्तें छोड़े, वहीं ईरान का कहना है कि जब तक समुद्र में उनकी नाकेबंदी खत्म नहीं होती, कोई समझौता नहीं होगा।

इजरायल भी जंग के लिए तैयार इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिए हैं कि ईरान में उनका काम अभी अधूरा है । इजरायल ने अपने लड़ाकू विमानों में मिसाइलें तैनात करते हुए वीडियो जारी किया है, जो सीधे तौर पर युद्ध के लिए तैयारी का संदेश है। नेतन्याहू इस सीजफायर के खत्म होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

ईरान का अडियल रुख और अहमद वाहिदी का प्रभाव ईरान समझौते की मेज पर झुकने को तैयार नहीं है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने साफ कहा है कि वे धमकी के दबाव में बातचीत नहीं करेंगे। इस सख्त रुख के पीछे ईरान के शीर्ष कमांडर अहमद वाहिदी का हाथ माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि वाहिदी अमेरिका के सबसे बड़े विरोधी हैं और ईरानी राष्ट्रपति से अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। फिलहाल, वाहिदी अमेरिकी शर्तों के सामने झुकने के खिलाफ हैं।

युद्ध हुआ तो क्या होगा? ईरान ने धमकी दी है कि अगर युद्ध दोबारा शुरू हुआ, तो वे दुनिया के बड़े तेल मार्गों—होर्मुज और बाब अल मंडेब—को बंद कर देंगे। इससे सऊदी अरब और यूएई सहित कई देशों का तेल निर्यात ठप हो सकता है। यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुनामी ला सकता है।

दुनिया पर संकट के बादल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष विराम समाप्त होने के बाद सैन्य टकराव होता है, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। अगर कोई बड़ा हमला होता है, तो कई अन्य ताकतवर देश भी सीधे तौर पर इस संघर्ष में कूद सकते हैं। आने वाले 24 घंटे यह तय करेंगे कि दुनिया एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ रही है या कूटनीति से शांति का रास्ता निकलेगा।

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