बीते कुछ दिनों से इंटरनेट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो जबरदस्त तरीके से छाया हुआ है। इस वीडियो में पीएम मोदी पश्चिम बंगाल के झारग्राम में सड़क किनारे एक आम दुकानदार से झालमुड़ी खरीदते और खाते नजर आ रहे हैं। महज 24 घंटे के भीतर इस वीडियो ने 10 करोड़ (100 मिलियन) व्यूज का आंकड़ा पार कर लिया है, जो सोशल मीडिया के इतिहास में एक बड़ा रिकॉर्ड है।
क्या यह महज एक इत्तेफाक है या सोची-समझी रणनीति? राजनीतिक विशेषज्ञ इसे प्रधानमंत्री की उस जन-नेता छवि का हिस्सा मानते हैं, जिसे वे सालों से गढ़ते आए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान किसी स्थानीय दुकान पर रुकना, वहां का खान-पान चखना और लोगों के बीच अपनी सादगी दिखाना—यह मोदी की ब्रांडिंग का एक पुराना और कारगर तरीका रहा है। 19 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल की चुनावी व्यस्तता के बीच लिया गया यह रणनीतिक ब्रेक सीधे तौर पर स्थानीय मतदाताओं के दिल तक पहुंचने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
विपक्ष का हमला: ड्रामा या जनसंपर्क? जाहिर है, इस वीडियो पर राजनीतिक खींचतान भी शुरू हो गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे ड्रामा करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यह सब पहले से तय नहीं था, तो वहां पहले से ही कैमरे कैसे मौजूद थे? हालांकि, भाजपा समर्थकों के लिए यह जनता से जुड़ाव का एक स्वाभाविक तरीका है, जबकि विरोधी इसे चुनावी मौसम में फोटो-ऑप (तस्वीर खिंचवाने का मौका) बताकर आलोचना कर रहे हैं।
तकनीक और नैरेटिव: मोदी की प्रचार शैली का पुराना पैटर्न पीएम मोदी की प्रचार शैली को समझने के लिए हमें 2007 के गुजरात चुनावों से लेकर 2014 के डिजिटल कैंपेन तक जाना होगा। वह तकनीक का इस्तेमाल करने वाले शुरुआती नेताओं में से हैं। 2014 में चाय पे चर्चा से लेकर 3D होलोग्राफिक रैलियों तक, उन्होंने यह बखूबी साबित किया है कि संदेश को कैसे वायरल बनाया जाता है।
असम में चाय बागान की महिलाओं के साथ नृत्य हो या बंगाल में स्थानीय भाषा में संवाद, मोदी हर राज्य की सांस्कृतिक नब्ज को पहचानते हैं। वह जानते हैं कि बंगाल में दुर्गा पूजा और बौद्धिक परंपरा के जरिए कैसे जुड़ना है, और दक्षिण भारत में तमिल संस्कृति की प्रशंसा करके कैसे एक सेतु बनाना है।
शॉर्ट वीडियो और रील्स का नया दौर बदलते वक्त के साथ मोदी ने अपने प्रचार के औजार भी बदले हैं। आज के रील्स के दौर में उनकी टीम छोटे, प्रभावशाली और भावनात्मक क्लिप्स पर ध्यान केंद्रित करती है। झालमुड़ी वाला वीडियो इसी आधुनिक चुनावी मार्केटिंग का एक हिस्सा है। वे रैलियों में भी अक्सर खुद भीड़ के वीडियो बनाते दिखते हैं, ताकि इंटरनेट पर उनकी उपस्थिति रियल और नेचुरल लगे।
निष्कर्ष: एक राष्ट्रीय नेता बनाम स्थानीय जुड़ाव यह वीडियो सिर्फ एक झालमुड़ी खाने का दृश्य नहीं है, बल्कि एक व्यापक संदेश है। मोदी अपनी हर रैली में स्थानीय उदाहरण, वहां के किसानों की समस्याएं और स्थानीय विकास की बात करते हैं। यही वजह है कि एक राष्ट्रीय नेता होने के बावजूद, वह हर राज्य में अपने से लगने लगते हैं।
चाहे इसे ड्रामा कहा जाए या कुशल राजनीतिक कौशल, यह सच है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल और जमीनी स्तर पर मतदाताओं को प्रभावित करने की क्षमता आज भी भारतीय राजनीति में बेजोड़ है।
Murarai, West Bengal: Chief Minister Mamata Banerjee says, They have fitted a microphone, jhalmuri prepared in a shop with the help of SPG. He doesn t have 10 rupees in his pocket. What a drama. During elections, he says, ‘I am a chaiwala,....Why was a camera already installed… pic.twitter.com/4fEAWNCjhX
— IANS (@ians_india) April 20, 2026
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