मणिपुर का बफर जोन बना डेथ जोन : मासूम बच्चों की मौत से दहला राज्य, सड़कों पर उतरा जनाक्रोश
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मणिपुर एक बार फिर जातीय हिंसा की आग में झुलस रहा है। शांति की उम्मीदों के बीच बिष्णुपुर जिले के त्रोंग्लाओबी (Tronglaobi) में हुए घातक रॉकेट हमले ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है। इस हमले में दो मासूम बच्चों की मौत के बाद घाटी के जिलों में तनाव चरम पर है।

क्या हुआ त्रोंग्लाओबी में? 7 अप्रैल की रात ओनाम बिनिता अपने दो बच्चों—5 वर्षीय तोमथिन और 5 महीने की लेइसाना—के साथ सो रही थीं। अचानक एक रॉकेट उनके घर पर गिरा। इस धमाके में दोनों बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई और मां गंभीर रूप से घायल हो गईं। यह हमला उस इलाके के पास हुआ जिसे सुरक्षा बलों ने बफर जोन के रूप में चिन्हित किया था, ताकि दो समुदायों के बीच टकराव न हो।

बफर जोन पर उठे गंभीर सवाल त्रोंग्लाओबी गांव सुरक्षा बलों के बफर जोन से महज एक किलोमीटर दूर है। सवाल यह उठ रहा है कि भारी सुरक्षा घेरे और केंद्रीय बलों की मौजूदगी के बावजूद, उग्रवादी रॉकेट दागने में कैसे कामयाब रहे? स्थानीय लोग अब इस बफर जोन को सुरक्षा के बजाय मौत का केंद्र (डेथ जोन) मान रहे हैं।

सड़कों पर उतरा मीरा पाइबी का गुस्सा इस घटना के बाद इंफाल घाटी में महिलाओं का पारंपरिक समूह मीरा पाइबी सड़कों पर उतर आया है। इंफाल वेस्ट में मशाल जुलूस के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं, जिसके बाद पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। 19 अप्रैल से शुरू हुआ पांच दिन का शटडाउन जनजीवन को पूरी तरह ठप कर चुका है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें और अल्टीमेटम प्रदर्शनकारियों ने 25 अप्रैल का अल्टीमेटम दिया है। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

सरकार की सफाई और संकट का सच राज्य के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजाम ने प्रदर्शनकारियों से शांति की अपील की है। सरकार ने दावा किया है कि इस मामले में 5 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है और पीड़ित परिवार को नौकरी दी जाएगी। हालांकि, सरकार ने भी यह स्वीकार किया है कि मणिपुर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अभी भी करीब 7,000 अतिरिक्त जवानों की भारी कमी है।

शांति के सामने सबसे बड़ी चुनौती तीन साल से जारी इस जातीय संघर्ष में अब तक 260 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 60,000 से अधिक लोग बेघर हो चुके हैं। फरवरी 2026 में नई सरकार बनने के बावजूद, जमीनी हकीकत यह है कि राज्य में अविश्वास की खाई और गहरी होती जा रही है। बफर जोन की विफलता और सुरक्षा बलों पर उठते सवाल नई सरकार के लिए बड़ी परीक्षा बन गए हैं।

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