क्या धोनी की प्लेइंग XI में वापसी होगी? या इम्पैक्ट प्लेयर बनकर आखिरी ओवरों में मचाएंगे कोहराम
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IPL 2026 में महेंद्र सिंह धोनी के खेलने को लेकर चर्चाएं तेज हैं। चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने लगातार दो जीत दर्ज करके अपनी लय वापस पा ली है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जीत रही टीम के प्लेइंग इलेवन में धोनी की जगह बनती है, या उनका किरदार बदल जाएगा?

विनिंग कॉम्बिनेशन बनाम धोनी की वापसी कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने पिछले मुकाबले में विनिंग टीम में कोई छेड़छाड़ नहीं की थी। ऐसे में अगर धोनी फिट भी होते हैं, तो क्या टीम मैनेजमेंट विनिंग कॉम्बिनेशन को तोड़कर उन्हें खिलाएगा? फिलहाल फ्रेंचाइजी के भीतर चर्चा यह है कि धोनी को सीधे प्लेइंग XI के बजाय ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यह भूमिका उन्हें सिर्फ आखिरी ओवरों में बल्लेबाजी के लिए मैदान पर उतारने की आजादी देगी।

44 की उम्र में भी फिनिशर का दम धोनी की उम्र भले ही 44 साल हो, लेकिन पिछले सीजन के आंकड़े बताते हैं कि वह अब भी खतरनाक हैं। उन्होंने 11 गेंदों पर 26 रन, 12 गेंदों पर 27 रन और 16 गेंदों पर नाबाद 30 रन जैसी पारियां खेलकर साबित किया कि उनका बल्ला शांत नहीं हुआ है। डेथ ओवर्स (16-20) में उनका स्ट्राइक रेट 180 से अधिक रहता है, जो उन्हें आज भी दुनिया के सबसे घातक फिनिशर्स में से एक बनाता है।

इम्पैक्ट प्लेयर ही है सबसे सटीक विकल्प? क्रिकेट एक्सपर्ट्स और पूर्व खिलाड़ी भी इसी राय पर सहमत हैं कि धोनी को इम्पैक्ट सब के रूप में इस्तेमाल करना सबसे फायदेमंद हो सकता है। खास तौर पर जब टीम लक्ष्य का पीछा कर रही हो, धोनी की शांत सोच और आखिरी ओवरों में छक्के मारने की क्षमता टीम के लिए वरदान साबित हो सकती है। डेथ ओवर्स में 3000 से अधिक रन और 200 से ज्यादा छक्कों का रिकॉर्ड उनके नाम है, जो किसी भी लक्ष्य को पार करने के लिए पर्याप्त है।

ड्रेसिंग रूम में धोनी का असर धोनी सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि टीम के मेंटर भी हैं। युवा खिलाड़ियों को सलाह देना, मैच के दौरान रणनीतियां बनाना और विकेट के पीछे से खेल को समझना—इन सब वजहों से धोनी की टीम में मौजूदगी ही टीम को जीत की राह पर बनाए रखने में मदद करती है। सीएसके अभी ट्रांजिशन फेज से गुजर रही है, जहां धोनी का अनुभव टीम की सबसे बड़ी ताकत बना हुआ है।

आगे की राह क्या? फिलहाल सीएसके की प्राथमिकता अपनी जीत की लय को बरकरार रखना है। अगर टीम जीतती रहती है, तो शायद प्लेइंग इलेवन में बड़ा बदलाव न हो। लेकिन जैसे ही टीम को फिनिशिंग में दिक्कत आएगी या किसी मुश्किल परिस्थिति का सामना करना पड़ेगा, कैप्टन कूल का मैदान पर उतरना तय माना जा रहा है। धोनी का बतौर इम्पैक्ट प्लेयर उतरना न केवल टीम के लिए रणनीतिक रूप से बेहतर है, बल्कि फैन्स के लिए भी एक बेहतरीन तोहफा होगा।

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