क्या शशि थरूर महिला विरोधी हैं? किरेन रिजिजू के साथ हुई बातचीत का दिलचस्प खुलासा
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संसद में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर मचे घमासान के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू के साथ हुई एक निजी बातचीत का जिक्र कर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

रिजिजू के साथ क्या हुई बात? तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तस्वीर साझा की। इसमें वे लोकसभा स्थगित होने के बाद किरेन रिजिजू और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ चर्चा करते दिख रहे हैं। थरूर के अनुसार, बातचीत के दौरान जब रिजिजू ने यह बताया कि उनकी पार्टी विपक्ष को महिला विरोधी क्यों कह रही है, तो थरूर ने स्पष्ट किया कि उन्हें कोई भी इस श्रेणी में नहीं रख सकता।

महिलाओं के सम्मान पर थरूर का रुख थरूर ने कहा कि महिलाएं मानव प्रजाति का सर्वश्रेष्ठ रूप हैं और उन्हें संसद समेत हर संस्था में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने आगे लिखा कि उनकी आपत्ति महिलाओं की प्रगति को लेकर नहीं, बल्कि उस शरारती सीमा निर्धारण (परिसीमन) से है, जो उनके अनुसार देश के लोकतंत्र के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

आरक्षण से नहीं, परिसीमन से है समस्या थरूर ने यह साफ कर दिया कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा, हम महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करते हैं। हमारी आपत्ति केवल इसे परिसीमन से जोड़ने पर है। थरुर का मानना है कि परिसीमन एक जटिल प्रक्रिया है और इसे जल्दबाजी में लागू करने से देश के सामने मौलिक सवाल खड़े हो सकते हैं।

राजनीतिक दांव-पेच का आरोप कांग्रेस नेता ने इसे महिलाओं के नाम पर किया जा रहा एक राजनीतिक खेल करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार अल्पकालिक राजनीतिक हितों के लिए महिलाओं का इस्तेमाल कर रही है। थरूर ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर सरकार बिना परिसीमन की शर्त के नया विधेयक लाती है, तो विपक्ष उसे तुरंत पारित करने में सहयोग देगा।

सदन में क्यों फंसा विधेयक? बता दें कि लोकसभा में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 के दौरान सरकार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया। इस विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जिसके चलते यह विधेयक पारित नहीं हो सका। अब देखना यह है कि क्या सरकार विपक्ष की मांग मानकर परिसीमन को अलग कर नया रास्ता अपनाती है या नहीं।

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