वॉशिंगटन: वैश्विक तेल बाजार में मची भारी उठापटक और ईरान-अमेरिका तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा रणनीतिक यू-टर्न लिया है। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर लगी पाबंदियों में अस्थायी ढील देने का फैसला किया है, जिससे भारत समेत उन देशों को बड़ी राहत मिली है जो रूसी ऊर्जा पर निर्भर हैं।
क्या है नया आधिकारिक आदेश? अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत, 17 अप्रैल से 16 मई तक रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद के लिए देशों को अनुमति दे दी गई है। सरल शब्दों में कहें तो, 16 मई तक समुद्र में मौजूद उन जहाजों से रूसी तेल की खरीद पर कोई अमेरिकी प्रतिबंध लागू नहीं होगा, जो पहले से लोड किए गए हैं।
क्यों मजबूर हुआ ट्रंप प्रशासन? हाल ही में वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया था कि कोई छूट नहीं दी जाएगी, लेकिन ईरान के साथ युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट के संकट ने समीकरण बदल दिए। वैश्विक तेल आपूर्ति का 20% हिस्सा इसी रास्ते (होर्मुज स्ट्रेट) से गुजरता है। इस रूट के प्रभावित होने से अमेरिका में गैस की कीमतें 4.15 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई थीं, जिससे घरेलू महंगाई बेकाबू होने का डर पैदा हो गया था। बाजार में सप्लाई बनी रहे, इसीलिए ट्रंप प्रशासन को यह अस्थायी राहत देनी पड़ी।
शर्तों के साथ मिली अनुमति हालांकि यह छूट राहत लेकर आई है, लेकिन इसमें सख्त शर्तें भी शामिल हैं। यह अनुमति केवल रूस के साथ लेनदेन के लिए है। ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से तेल खरीदने पर अभी भी अमेरिकी प्रतिबंध पूरी तरह लागू हैं। यानी रूस के साथ व्यापार की छूट का लाभ उठाकर कोई भी देश इन प्रतिबंधित देशों के साथ डील नहीं कर सकेगा।
कीमतों में गिरावट, भारत को क्या फायदा? होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने के ऐलान के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में 13% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार को कच्चा तेल 99.39 डॉलर से गिरकर 86 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। यह गिरावट और रूसी तेल खरीद पर मिली एक महीने की मोहलत भारत के लिए राहत की खबर है। इससे भारत के आयात बिल पर दबाव कम होगा और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
सप्लाई संकट का समाधान? रूस के राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रिएव के मुताबिक, इस कदम से बाजार में कच्चे तेल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। युद्ध के दौरान कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था, जिसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया था। अब जबकि होर्मुज रूट फिर से खुल गया है और अमेरिका ने रूसी तेल पर थोड़ी नरमी बरती है, बाजार में स्थिरता लौटने की उम्मीद है।
US allows transactions with Russian oil loaded onto tankers before April 17. The document is valid until May 16 — US Treasury document quoted by special presidential envoy @kadmitriev. Russian tanker footage from CBS. Price quote from Reuters pic.twitter.com/Um082vdvra
— RT (@RT_com) April 18, 2026
हैदराबाद के नवाबों ने चेन्नई को 10 रन से चटाई धूल, अभिषेक-क्लासेन के तूफान के बाद नीतीश-ईशान का घातक वार
आप कहोगे तो संन्यास ले लूंगा... अपने खराब फॉर्म पर मोहम्मद रिजवान का बड़ा बयान
मारवाड़ी बिजनेस का 1000 दिन फॉर्मूला: सफलता की गारंटी या महज एक मिथक?
संजू सैमसन की बाज जैसी नजर: जब अपील की जरूरत नहीं पड़ी, तो विकेटकीपर ने पलट दिया मैच का रुख
फतेहपुर के मशहूर चायवाले का दर्द: अखिलेश यादव ने कहा, ‘चिंता न करें, बुरे दिन जाने वाले हैं’
मच्छरदानी के अंदर रात भर ड्यूटी: सिक्योरिटी गार्ड की हालत देख छलके लोगों के आंसू
राष्ट्र के नाम संबोधन या चुनावी भाषण? पीएम मोदी पर क्यों भड़का विपक्ष
भारत-रूस रक्षा समझौते का नया अध्याय: एक-दूसरे के देश में तैनात होंगे 3000 सैनिक और जंगी बेड़े
श्रेयस अय्यर का सुपरमैन कैच: सचिन तेंदुलकर ने डिकोड किया उस 1 सेकंड का गणित
पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले ED का बड़ा प्रहार: कोलकाता DCP और नामी कारोबारी के ठिकानों पर छापेमारी