संसद का विशेष सत्र देश के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद अहम था। महिला आरक्षण विधेयक जैसे ऐतिहासिक मुद्दे पर चर्चा के दौरान पूरा देश विपक्ष के नेता राहुल गांधी से ठोस सुझावों की उम्मीद कर रहा था। लेकिन, उनके भाषण ने सदन की गरिमा के बजाय चुनावी रैली जैसी तल्खी पेश की।
संसदीय मर्यादा को दरकिनार कर व्यक्तिगत हमले राहुल गांधी ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जादूगर जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने पीएम को बालकोट का जादूगर , नोटबंदी का जादूगर और सिंदूर का जादूगर कहकर संबोधित किया। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे देश और प्रधानमंत्री का अपमान बताया। स्पीकर ओम बिरला ने भी राहुल को मर्यादित भाषा का प्रयोग करने की हिदायत दी।
अनसुलझी फिलॉसफी और विषयांतर महिला आरक्षण जैसे गंभीर विषय पर बात करने के बजाय राहुल गांधी ने अपनी दादी इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए अंधेरे और शिव की कहानी सुनाई। यह स्पष्ट था कि उनके पास बिल की तकनीकी बारीकियों या भविष्य के रोडमैप पर चर्चा करने के लिए कोई ठोस तर्क नहीं था। मुख्य मुद्दों से भागने के लिए दार्शनिक बातों का सहारा लेना एक अपरिपक्व नेतृत्व को दर्शाता है।
उत्तर बनाम दक्षिण का खतरनाक दांव अपने भाषण में राहुल गांधी ने परिसीमन प्रक्रिया को एक साजिश के रूप में पेश करने की कोशिश की। उन्होंने दक्षिण भारतीय राज्यों और पूर्वोत्तर के राज्यों को डराने का प्रयास करते हुए इसे देश विरोधी कदम बताया। जानकारों का मानना है कि एक राष्ट्रीय पार्टी के नेता द्वारा इस तरह की विभाजनकारी भाषा का इस्तेमाल क्षेत्रीय भावनाओं को भड़काने और देश की एकता के लिए हानिकारक हो सकता है।
सदन में भाषण देकर गायब होने की आदत राहुल गांधी के भाषण के तुरंत बाद सदन से बाहर चले जाने पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने उन्हें आड़े हाथों लिया। सदन की परंपरा कहती है कि अपनी बात रखने के बाद नेता को विपक्ष के तर्कों को सुनना चाहिए। राहुल का बार-बार भाषण देकर भाग जाना यह साबित करता है कि वे संवाद और आलोचना का सामना करने के बजाय केवल अपनी बात थोपने में विश्वास रखते हैं।
जाति जनगणना का राग और पुरानी राजनीति महिला सशक्तिकरण के मर्म को दरकिनार कर राहुल गांधी ने पूरी बहस को अचानक जाति जनगणना और मनुवाद बनाम संविधान की लड़ाई में मोड़ दिया। कांग्रेस की दशकों पुरानी सरकारों ने कभी इस बिल को पारित करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाई, लेकिन आज जब सरकार इसे धरातल पर उतार रही है, तो राहुल द्वारा इसमें रोड़े अटकाना केवल उनकी हताशा को दर्शाता है।
निष्कर्ष राहुल गांधी का यह भाषण न केवल विजन से खाली था, बल्कि पूरी तरह से नकारात्मक भी रहा। संसद में चिल्लाने और निराधार आरोप लगाने से कोई जननेता नहीं बनता। महिला आरक्षण जैसे बड़े सपने को महज राजनीति चमकाने का जरिया बनाना यह साबित करता है कि राहुल गांधी एक रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने में विफल रहे हैं।
VIDEO | In Lok Sabha, Union Defence Minister Rajnath Singh schools LoP Rahul Gandhi over his magician jab at PM.
— Press Trust of India (@PTI_News) April 17, 2026
The kind of words being used by the Leader of the Opposition about the Prime Minister of this country are extremely unfortunate. I believe that no amount of… pic.twitter.com/W084RVJLA5
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