अब और हत्या नहीं : इजरायल-लेबनान के बीच 10 दिन का सीजफायर, क्या ट्रंप की अपील काम आएगी?
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इजरायल और लेबनान के बीच लंबे समय से जारी भीषण तनाव के बाद आखिरकार शांति की उम्मीद जगी है। अमेरिका की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच 10 दिनों का अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) लागू कर दिया गया है। यह समझौता मंगलवार शाम 5 बजे (ET) से प्रभावी हो गया है।

ट्रंप की हिजबुल्लाह को दो टूक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते के बाद हिजबुल्लाह को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट के जरिए अपील की है कि हिजबुल्लाह इस दौरान जिम्मेदार व्यवहार अपनाए। ट्रंप ने साफ कहा, मुझे उम्मीद है कि हिजबुल्लाह इस मौके का इस्तेमाल शांति के लिए करेगा। अब और अधिक हत्याएं नहीं होनी चाहिए। आखिरकार शांति आनी ही चाहिए।

ट्रंप का शांति दूत वाला दावा इस महत्वपूर्ण समझौते के साथ ही ट्रंप ने खुद को शांति स्थापित करने वाले के रूप में पेश किया है। उन्होंने दावा किया कि दुनिया भर में अब तक 9 युद्धों को रुकवाने में उन्होंने कामयाबी हासिल की है और लेबनान-इजरायल का यह मामला उनका 10वां सफल प्रयास होगा।

क्या टिक पाएगा यह सीजफायर? समझौते के बावजूद विशेषज्ञों की नजरें इसकी स्थिरता पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह युद्धविराम 10 दिन बाद भी जारी रहेगा? इसका प्रमुख कारण यह है कि हिजबुल्लाह आधिकारिक रूप से इस समझौते का सीधा पक्षकार नहीं है, जिससे इसके उल्लंघन का खतरा बना हुआ है।

इजरायल का सख्त रुख इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने समझौते के बाद भी अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। नेतन्याहू ने साफ किया है कि इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में तैनात रहेगी। इजरायल अपनी सुरक्षा जरूरतों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखेगा।

यह सीजफायर क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक अहम पड़ाव तो है, लेकिन इसकी सफलता पूरी तरह से हिजबुल्लाह के व्यवहार और इजरायल की सुरक्षा चिंताओं के बीच आपसी संतुलन पर निर्भर करेगी। फिलहाल, पूरी दुनिया इस बात पर टिकी है कि क्या यह अस्थायी शांति एक स्थायी समाधान की शुरुआत बन पाएगी।

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