मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा 10 दिनों का इजरायल-लेबनान संघर्ष विराम (सीजफायर) लागू होने के कुछ ही घंटों के भीतर विवादों में घिर गया है। सीजफायर की घोषणा के तुरंत बाद ही जमीनी हालात बिगड़ने लगे, जिससे शांति वार्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सीजफायर के दावों और हकीकत में अंतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से हुए इस समझौते को क्षेत्र में स्थिरता लाने वाला कदम माना जा रहा था। हालांकि, लेबनान की सेना ने इजरायल पर सीजफायर का खुला उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। लेबनान का दावा है कि इजरायली बल दक्षिणी इलाकों में लगातार आक्रामक गतिविधियां जारी रखे हुए हैं, जिससे समझौते की विश्वसनीयता खत्म हो गई है।
बेरूत में गोलीबारी ने बढ़ाई चिंता सीजफायर के लागू होते ही बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में गोलीबारी की आवाजें सुनाई दीं। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर तनाव अब भी जस का तस है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के छिटपुट टकराव किसी भी वक्त बड़े युद्ध में बदल सकते हैं, खासकर तब जब हिजबुल्लाह जैसे सक्रिय संगठन अपनी स्थिति छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।
ट्रंप का बयान और कूटनीतिक पहेली एक रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को छोटा सा भटकाव करार दिया। उन्होंने इसे अमेरिका की सुरक्षा और ईरान की परमाणु क्षमताओं को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक बताया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता, जहां हिंसा की खबरें लगातार आ रही हैं।
इस्लामाबाद में अगली बड़ी कूटनीतिक चाल अब सबकी निगाहें पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का अगला दौर प्रस्तावित है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर वार्ता सफल होती है तो राष्ट्रपति ट्रंप खुद पाकिस्तान का दौरा कर सकते हैं। यह कदम क्षेत्र में एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव ला सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व इस संघर्ष का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। वैश्विक नेता, जिनमें ब्रिटेन के कीर स्टारमर और फ्रांस के इमैनुएल मैक्रों शामिल हैं, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। यह समुद्री मार्ग दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा है। इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ सकता है।
फिलहाल, इजरायल-लेबनान सीमा पर शांति की यह कोशिश एक तूफान से पहले की खामोशी लगती है। कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है, लेकिन जमीन पर भरोसा पूरी तरह टूट चुका है। क्या यह समझौता केवल एक दिखावा साबित होगा या शांति की ओर बढ़ने का कोई ठोस रास्ता निकलेगा? असली परीक्षा अभी बाकी है।
The United States has announced that Israel-Lebanon talks will take place on Thursday, but there was no confirmation from #Lebanon.
— China Daily (@ChinaDaily) April 17, 2026
Trying to get a little breathing room between #Israel and Lebanon, #US President Donald Trump said on Wednesday on social media.… pic.twitter.com/kw50BofwjP
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