पश्चिम बंगाल चुनाव: केंद्रीय बलों पर ममता का बड़ा हमला, BJP की सेना बताकर लोगों को किया आगाह
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पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पारा उफान पर है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय अर्ध-सैनिक बलों (CPAF) की तैनाती पर सवाल उठाकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर इन बलों को लोगों की सुरक्षा के बजाय बीजेपी का मोहरा बताया है।

अमित शाह की सेना का दिया नाम एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल में तैनात केंद्रीय सुरक्षा बल जनता की हिफाजत के लिए नहीं, बल्कि उन्हें डराने-धमकाने के लिए आए हैं। उन्होंने इन बलों को अमित शाह की जमीनी सेना करार दिया है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ये बल लोगों को परेशान और विवश कर रहे हैं।

सीतलकुची कांड की याद दिलाई ममता ने अपने संबोधन में सीतलकुची में हुई गोलीबारी की घटना का उल्लेख करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता उन घटनाओं को भूली नहीं है, जहां बेगुनाह लोगों की जान गई थी। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि बंगाल अब बंदूक की नोक पर चुप नहीं रहने वाला है।

शिकायत करने का दिया भरोसा राज्य की मुखिया ने लोगों से आह्वान किया कि यदि उन्हें कहीं भी केंद्रीय बलों की ओर से जबरदस्ती या खतरा महसूस हो, तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायतों पर त्वरित और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

BJP ने किया पलटवार ममता बनर्जी के इस बयान पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भगवा खेमे का आरोप है कि सीएम जानबूझकर केंद्रीय बलों को बदनाम कर रही हैं ताकि चुनाव में हिंसा को बढ़ावा दिया जा सके। बीजेपी नेताओं का कहना है कि टीएमसी खुद चुनावी हिंसा में लिप्त रही है, जबकि केंद्रीय बलों को निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए भेजा गया है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला इस बीच, बंगाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्देश जारी किया है। अदालत ने अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए कहा कि यदि ट्रिब्यूनल मतदान से दो दिन पहले भी किसी का नाम जोड़ने या हटाने का अंतिम आदेश देता है, तो उसे लागू करना होगा। इससे उन मतदाताओं को राहत मिलेगी जिनके नाम अंतिम समय में सूची में शामिल किए जाएंगे।

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