नोएडा प्रशासन ने मजदूरों की प्रमुख मांगें मान ली हैं, न्यूनतम वेतन बढ़ा दिया गया है और कार्यस्थल पर सुधार के वादे किए गए हैं। लेकिन इन सरकारी आश्वासनों के बीच नोएडा की सड़कों पर सन्नाटा है और पुलिस थानों के बाहर अपनों की तलाश में भटकते परिवारों का तांता लगा है।
पुलिस थानों के बाहर लगा है अनिश्चितता का डेरा मंगलवार (14 अप्रैल) को नोएडा के फेज़-2 पुलिस थाने के बाहर शहनाज़ जैसे कई लोग अपने परिजनों की तलाश में भटकते दिखे। उनके भतीजे सफ़ीक मोहम्मद शनिवार से लापता थे। जब वह शिकायत दर्ज कराने गईं, तो पुलिस ने उन्हें खाली कागज थमाकर वापस भेज दिया। शहनाज़ जैसे दर्जनों परिवार इस बात से अनजान हैं कि उनके सदस्य हिरासत में हैं या कहीं और।
हिंसा और धरपकड़ का दौर नोएडा में हाल ही में वेतन वृद्धि और बेहतर कामकाजी हालातों की मांग को लेकर करीब 40 हजार मजदूर सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई, गाड़ियां जलाई गईं और फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ हुई। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के अनुसार, इस मामले में अब तक 300 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों का दावा है कि गिरफ्तारियां कानूनी प्रक्रिया के तहत हैं, लेकिन परिवारों का कहना है कि उन्हें कोई सूचना नहीं दी जा रही।
कागजों पर बढ़ा वेतन, हकीकत में खोखलापन एक तरफ प्रशासन न्यूनतम वेतन 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये करने का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ ग्राउंड जीरो पर स्थिति अलग है। फैक्ट्रियों में काम करने वाले 21 वर्षीय रोहित सिंह जैसे युवा बताते हैं कि 12-14 घंटे की शिफ्ट और कमरतोड़ महंगाई में यह बढ़ोतरी नाकाफी है। वे बताते हैं कि 5,500 रुपये सिर्फ कमरे का किराया है, ऐसे में घर चलाना और बचत करना नामुमकिन है।
सिस्टम के सामने हम मशीन नहीं, इंसान हैं मजदूरों का दर्द सिर्फ वेतन तक सीमित नहीं है। प्रीति मौर्या जैसे मजदूर बताते हैं कि कैसे उनके भाई को फैक्ट्रियों ने काम पर बुलाया और उसके बाद से वे लापता हैं। मजदूरों के रहने की दयनीय स्थिति, जलभराव और 12 घंटे की शिफ्ट के बाद भी उन्हें मशीन की तरह समझा जाता है। उनका कहना है कि अगर वे अपने हक़ की मांग भी न करें, तो क्या करें?
क्या साज़िश बनाम जनता की लड़ाई है यह? प्रशासन ने प्रदर्शनों के पीछे किसी गहरी साज़िश की ओर इशारा किया है। वहीं, जिला अधिकारी का कहना है कि सरकार ओवरटाइम के लिए दोगुना वेतन, हर महीने की 10 तारीख तक भुगतान और यौन उत्पीड़न रोकने के लिए समितियों का गठन जैसे सख्त निर्देश दे चुकी है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि उपद्रव करने वाली एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
भरोसे का संकट सरकारी दावों और सुधारों के बावजूद नोएडा के मजदूरों के मन में एक गहरा डर और अविश्वास है। फैक्ट्रियों के मालिकों की चुप्पी और पुलिस की कार्यप्रणाली ने मजदूरों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या ये बदलाव कभी उनकी असल जिंदगी में धरातल पर उतरेंगे? फिलहाल, नोएडा के पुलिस थानों के बाहर खड़े ये परिवार केवल अपने अपनों की वापसी का इंतज़ार कर रहे हैं।
*श्रमिकों के हित में ऐतिहासिक फैसला
— Haryana BJP (@BJP4Haryana) April 8, 2026
अब न्यूनतम मजदूरी ₹11257 से बढ़ाकर की ₹15,220; सभी श्रमिकों को बधाई!@NayabSainiBJP pic.twitter.com/75x2u17Eu5
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