दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार को आबकारी नीति मामले से जुड़ा एक हाई-प्रोफाइल मामला चर्चा में रहा। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के सामने अपनी याचिका रखी, जिसमें उन्होंने जज से खुद को सुनवाई से अलग करने (recusal) का अनुरोध किया है।
न्याय पर संदेह का माहौल केजरीवाल ने कोर्ट में अपनी बात रखते हुए कहा कि निचली अदालत ने तीन महीने तक सुनवाई के बाद उन्हें बरी किया था। उन्होंने कहा, जब हाई कोर्ट का शुरुआती आदेश आया, तो मैं अंदर से हिल गया। मुझे शक होने लगा कि क्या मुझे यहां निष्पक्ष न्याय मिल पाएगा। केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी जज पर पक्षपात साबित करना जरूरी नहीं है, अगर किसी पक्ष के मन में वाजिब शक भी है, तो जज का केस से हटना उचित है।
तथ्यों से पहले ही राय बना ली गई केजरीवाल ने दलील दी कि सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के दौरान, बिना अन्य पक्षों को सुने ही एकतरफा आदेश पारित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले को महज 5 मिनट में प्रथम दृष्टया गलत ठहरा दिया गया। उन्होंने दावा किया कि गिरफ्तारी की वैधता से जुड़े उनके मामले में अदालत की टिप्पणियां ऐसी थीं, मानो उन्हें पहले ही दोषी और भ्रष्ट मान लिया गया हो।
सीबीआई की प्रतिक्रिया और कोर्ट का रुख वहीं, सीबीआई ने केजरीवाल की इस अर्जी का विरोध किया है। एजेंसी का तर्क है कि मात्र एक कानून सेमिनार में शामिल होने भर से जज पर वैचारिक जुड़ाव का आरोप नहीं लगाया जा सकता। इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने केस को किसी दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की केजरीवाल की मांग को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि जज से अलग होने का निर्णय खुद उन्हें ही लेना है।
क्या है निचली अदालत का फैसला? बता दें कि निचली अदालत ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य को आबकारी नीति मामले में बरी कर दिया था। कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाते हुए कहा था कि उनका मामला न्यायिक जांच में पूरी तरह विफल रहा और आधारहीन था। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा खुद को इस मामले से अलग करने पर फैसला लेंगी या सुनवाई जारी रहेगी।
#WATCH | Former Delhi CM and AAP National Convener Arvind Kejriwal arrives at Delhi High Court for a hearing on his recusal petition. He has filed his recusal petition before Justice Swarn Kanta Sharma.
— ANI (@ANI) April 13, 2026
I will speak only before the Court. Matter is sub-judice, he says. pic.twitter.com/BGwzgvTxQr
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