4 मई के बाद बंगाल में चार शादी पर रोक और UCC का वादा: अमित शाह का ममता सरकार पर बड़ा प्रहार
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के सियासी संग्राम में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। बीरभूम और पश्चिम बर्धमान की जनसभाओं में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ममता बनर्जी सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि भाजपा सत्ता में आई तो बंगाल की तस्वीर पूरी तरह बदल दी जाएगी।

सिंडिकेट राज का अंत और भ्रष्टाचार पर वार शाह ने ममता सरकार को सिंडिकेट ऑपरेटरों की सरकार बताते हुए कहा कि राज्य में हर स्तर पर भ्रष्टाचार व्याप्त है। कोयला, रेत से लेकर ट्रांसफर-पोस्टिंग तक में कट मनी का खेल चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा सिस्टम मुख्यमंत्री और उनके भतीजे द्वारा संचालित है। शाह ने जनता से वादा किया कि 5 मई से भाजपा इस भ्रष्टाचार और सिंडिकेट सिस्टम को जड़ से खत्म करने का काम शुरू करेगी।

UCC लागू करने का संकल्प पश्चिम बर्धमान में अमित शाह ने बड़ा चुनावी कार्ड खेलते हुए कहा कि बंगाल में भाजपा की सरकार बनते ही समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की जाएगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ममता सरकार में कुछ लोगों को चार शादियां करने की छूट है। 5 मई को भाजपा सरकार बनते ही इसे बंद कर दिया जाएगा। अगर कोई चार शादी करने की कोशिश करेगा, तो वह सीधा जेल जाएगा।

घुसपैठियों पर होगी सख्त कार्रवाई शाह ने ममता सरकार पर घुसपैठियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ममता सरकार बीएसएफ को सीमा पर बाड़ लगाने के लिए 600 एकड़ जमीन नहीं दे रही है। शाह ने संकल्प लिया कि भाजपा की सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर यह जमीन बीएसएफ को सौंप दी जाएगी और देश व बंगाल से एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर बाहर निकाला जाएगा।

राजनीतिक हिंसा और बाबरी मस्जिद का मुद्दा अमित शाह ने ममता सरकार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ममता बनर्जी के सहयोगी राज्य में बाबरी मस्जिद बनाने का सपना देख रहे हैं, जिसे भाजपा किसी भी हाल में पूरा नहीं होने देगी। साथ ही, उन्होंने टीएमसी कार्यकर्ताओं को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, 4 मई के बाद तुम्हारी खैर नहीं है।

बदलाव की लड़ाई में भाजपा का आक्रामक रुख प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों के बाद अमित शाह की ताबड़तोड़ जनसभाएं यह दर्शाती हैं कि भाजपा इस चुनाव को केवल एक राजनीतिक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बंगाल की आजादी और बदलाव की लड़ाई देख रही है। 23 और 29 अप्रैल को होने वाला मतदान और 4 मई के नतीजे तय करेंगे कि बंगाल की जनता ममता बनर्जी के 15 साल के शासन पर भरोसा जताती है या परिवर्तन के साथ जाती है।

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