सूरज जैसी आग से टकराकर लौटे आर्टेमिस-2 के जांबाज: मौत को मात देने वाली वापसी की पूरी कहानी
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नासा का ऐतिहासिक आर्टेमिस-2 मिशन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के करीब अपनी यात्रा पूरी कर सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आए हैं। भारतीय समयानुसार आज सुबह करीब साढ़े 5 बजे, यह दल प्रशांत महासागर में उतरा। यह मिशन जितना साहसी था, इसकी वापसी उतनी ही खतरनाक रही।

ध्वनि से 36 गुना तेज रफ्तार

अंतरिक्ष यात्री ओरियन कैप्सूल में सवार होकर धरती पर लौटे। जब इस कैप्सूल ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया, तो इसकी रफ्तार 40,000 किलोमीटर प्रति घंटा थी। यह ध्वनि की गति से करीब 36 गुना अधिक है। इतनी प्रचंड गति पर हवा एक ठोस दीवार की तरह व्यवहार करती है, जिससे कैप्सूल के चारों ओर प्लाज्मा का दहकता गोला बन गया था।

सूरज की सतह जैसी भीषण गर्मी

वायुमंडल में प्रवेश करते ही कैप्सूल का बाहरी तापमान 2,800 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह तापमान ज्वालामुखी के लावे से दोगुना और सूर्य की बाहरी सतह के आधे तापमान के बराबर है। इतनी भीषण गर्मी के बीच यात्रियों को सुरक्षित रखने के लिए नासा ने विशेष हीट शील्ड का उपयोग किया।

एब्लेटिव तकनीक और स्किप री-एंट्री का कमाल

आर्टेमिस-1 की वापसी से सीख लेते हुए नासा ने इस बार हीट शील्ड को और अधिक मजबूत बनाया। इसे एब्लेटिव तकनीक से तैयार किया गया था, जो खुद धीरे-धीरे जलकर कैप्सूल के अंदरूनी हिस्से को ठंडा रखती है। साथ ही, स्किप री-एंट्री तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे कैप्सूल पानी पर उछलते पत्थर की तरह वायुमंडल में प्रवेश करते हुए अपनी गति और तापमान को नियंत्रित कर सका।

52 साल बाद बनाया नया रिकॉर्ड

इस मिशन में रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैन्सन शामिल थे। इन यात्रियों ने पृथ्वी से 4,06,771 किलोमीटर दूर जाने का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। करीब 52 साल बाद इंसान इतनी गहराई से चांद के करीब पहुंचकर वापस लौटा है।

अगला पड़ाव: चंद्रमा पर इंसानी बस्ती

आर्टेमिस-2 की इस सफलता ने आर्टेमिस-3 के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। अब नासा का लक्ष्य चंद्रमा की सतह पर इंसानों को उतारना है। इस मिशन का दीर्घकालिक उद्देश्य चंद्रमा पर एक स्थायी बेस तैयार करना है, जो भविष्य में मंगल ग्रह की यात्रा के लिए एक आधार बिंदु (लॉन्चिंग पैड) के रूप में कार्य करेगा।

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