आधुनिक युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। अब भारी-भरकम मिसाइलों के दौर में एक नई साइलेंट किलर तकनीक सामने आई है, जो आसमान में झुंड बनाकर हमला करने वाले ड्रोन्स के लिए काल साबित हो रही है। इस तकनीक ने न केवल सेना के जानकारों को बल्कि उद्योग जगत के दिग्गजों को भी चौंका दिया है।
क्या है यह माइक्रोवेव तकनीक? हाल ही में बिजनेसमैन आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें हाई-पावर माइक्रोवेव पल्स (HPM) का इस्तेमाल करते हुए 49 ड्रोन्स के एक पूरे बेड़े को एक पल में बेकार करते दिखाया गया। यह सिस्टम किसी एक टारगेट को नहीं, बल्कि एक बड़े एयरस्पेस को कवर करता है। एक पल्स छोड़ते ही दायरे में आने वाले सभी ड्रोन्स के इलेक्ट्रॉनिक्स पूरी तरह ठप हो जाते हैं और वे कबाड़ बनकर जमीन पर गिर पड़ते हैं।
सस्ता हमला, महंगा बचाव: युद्ध का कड़वा सच आनंद महिंद्रा ने युद्ध के एक बड़े आर्थिक पहलू कॉस्ट इम्बैलेंस पर प्रकाश डाला है। आज के समय में कामीकाजे या सुसाइड ड्रोन बनाना बेहद सस्ता है, जबकि उन्हें हवा में मार गिराने वाली मिसाइलें करोड़ों की होती हैं। यदि दुश्मन सस्ते ड्रोन भेजकर आपकी महंगी मिसाइलें खर्च करवा देता है, तो वह बिना लड़े ही आपको आर्थिक रूप से पंगु बना सकता है। HPM इसी वित्तीय घाटे को रोकने का सबसे सटीक समाधान है।
लेजर से क्यों बेहतर है HPM? ज्यादातर लोग लेजर हथियारों को भविष्य मानते हैं, लेकिन उनकी एक सीमा है। लेजर एक बार में केवल एक ही लक्ष्य को साध सकता है, जो झुंड (Swarm) में हमला करने वाले ड्रोन्स के सामने फेल हो सकता है। इसके विपरीत, HPM तकनीक एक बड़े दायरे में मौजूद हर ड्रोन को एक साथ निष्क्रिय करने की क्षमता रखती है। भविष्य का एयर डिफेंस लेयर्ड होगा, जिसमें मिसाइल, गन, लेजर और HPM मिलकर सुरक्षा चक्र बनाएंगे।
भारत को अब क्या करने की जरूरत है? महिंद्रा ने स्पष्ट किया है कि भारत को विदेशी तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय स्वदेशी क्षमता विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए। भारत के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस जरूरत है—तेज खरीद प्रक्रियाओं, पूंजी के सही प्रवाह और डीप-टेक स्टार्टअप्स को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की। यह तकनीक न केवल सैन्य दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत के आत्मनिर्भर होने के सपने को एक नई दिशा दे सकती है।
49 drones. One pulse. All gone.
— anand mahindra (@anandmahindra) April 10, 2026
Beyond the tech, it shows a shift where scale and economics matter as much as firepower.
Recent conflicts highlight a brutal reality: cheap kamikaze drones cost a fraction of the interceptors sent to destroy them.
The aggressor doesn’t need to… pic.twitter.com/InyDPk2Iom
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