ईरान की जेलों में कैद वो 6 अमेरिकी कौन? जिनकी रिहाई के लिए इस्लामाबाद में बिछाई जा रही बिसात
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मिडिल ईस्ट के जलते हुए हालातों के बीच अब एक नया और बेहद संवेदनशील मुद्दा केंद्र में आ गया है। ईरान की जेलों में बंद अमेरिकी नागरिकों की रिहाई को लेकर अमेरिका ने अब इस्लामाबाद वार्ता में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच चुका है।

कौन हैं ईरान में कैद अमेरिकी नागरिक? रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में कम से कम 6 अमेरिकी नागरिक हिरासत में हैं। इनमें दो सबसे चर्चित नाम रज़ा वलीज़ादेह और कामरान हेकमती हैं। रज़ा वलीज़ादेह एक पत्रकार हैं जिन्हें 2024 में ईरान यात्रा के दौरान गिरफ्तार कर 10 साल की सजा सुनाई गई थी। वहीं, जौहरी कामरान हेकमती परिवार से मिलने ईरान गए थे, जहां उनका पासपोर्ट जब्त कर उन्हें तेहरान की कुख्यात एविन जेल में डाल दिया गया।

इस्लामाबाद में हाई-स्टेक्स डिप्लोमेसी इस महत्वपूर्ण वार्ता के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को पूरी तरह सील कर दिया गया है। रेड ज़ोन में धारा-144 लागू है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में जे.डी. वेंस के साथ विटकॉफ और कुशनर जैसे नाम शामिल हैं। 1979 के बाद यह पहली बार है जब अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधि किसी तीसरे देश की जमीन पर आमने-सामने हैं।

अमेरिका का दबाव बनाम ईरान की शर्तें अमेरिका का स्पष्ट स्टैंड है कि इन नागरिकों को बिना शर्त रिहा किया जाए। हालांकि, तेहरान ने बातचीत की राह कठिन कर दी है। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने कहा है कि जब तक लेबनान में सीजफायर नहीं होता और फ्रीज किए गए ईरानी फंड जारी नहीं किए जाते, तब तक कोई समझौता संभव नहीं है।

ट्रंप की चेतावनी और सैन्य अलर्ट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए संकेत दिया है कि यदि कूटनीति विफल रहती है, तो अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर सकता है। ट्रंप के इस बयान ने क्षेत्र में तनाव को और हवा दे दी है। अमेरिकी सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है, जिससे यह साफ है कि वाशिंगटन अब और अधिक देरी के मूड में नहीं है।

पाकिस्तान की भूमिका और अनिश्चित भविष्य इस पूरे ड्रामे में पाकिस्तान एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सैन्य नेतृत्व इसे अपनी कूटनीतिक जीत साबित करने की कोशिश में है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या इस्लामाबाद वार्ता इन कैदियों की रिहाई का रास्ता खोल पाएगी, या यह बातचीत एक नए और भीषण क्षेत्रीय संघर्ष की शुरुआत बनेगी।

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