इस्लामाबाद वार्ता: अमेरिका तैयार, ईरान पर सस्पेंस; पाक ने वीजा-ऑन-अराइवल से बचाने की कोशिश की नाक
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पाकिस्तान आज एक बेहद संवेदनशील कूटनीतिक आयोजन की मेजबानी कर रहा है। इस्लामाबाद वार्ता 2026 के नाम से होने वाले इस कार्यक्रम में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावना जताई गई है। हालांकि, बैठक शुरू होने से पहले ही ईरान की भागीदारी को लेकर बड़ा सस्पेंस बना हुआ है।

साख बचाने के लिए पाक का वीजा-ऑन-अराइवल दांव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कूटनीतिक प्रासंगिकता साबित करने की कोशिश में जुटा पाकिस्तान इस आयोजन को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। अपनी छवि और मेजबान के तौर पर इज्जत बचाने के लिए पाकिस्तान ने एक बड़ा ऐलान किया है। विदेश मंत्री इशाक डार ने घोषणा की है कि आयोजन में शामिल होने वाले विदेशी प्रतिनिधियों और पत्रकारों को वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा दी जाएगी।

पाकिस्तान ने सभी एयरलाइनों से अपील की है कि वे ऐसे यात्रियों को बिना वीजा के बोर्डिंग की अनुमति दें। पाकिस्तान का आव्रजन विभाग उन्हें पहुंचने पर वीजा जारी करेगा। जानकारों का कहना है कि यह कदम सिर्फ सुविधा के लिए नहीं, बल्कि कम भागीदारी के डर को देखते हुए उठाया गया है ताकि किसी तरह मेहमानों को सीमा तक बुलाया जा सके।

अमेरिका का बड़ा प्रतिनिधिमंडल तैयार इस बातचीत में अमेरिका की भागीदारी लगभग तय है। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस करेंगे। उनके साथ डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सलाहकार स्टीव विटकॉफ और जारेड कुश्नर भी इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं। अमेरिका इस बैठक को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने के एक आखिरी मौके के रूप में देख रहा है।

ईरान ने दावों को किया खारिज दूसरी ओर, ईरान का रुख बेहद सख्त बना हुआ है। शुरुआती रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची वार्ता में शामिल हो सकते हैं। लेकिन ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी मेहर ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है।

ईरानी सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि जब तक अमेरिका अपने सीजफायर संबंधी वादों को पूरा नहीं करता और लेबनान में इजरायली हमले नहीं रुकते, तब तक कोई आधिकारिक वार्ता दल इस्लामाबाद नहीं जाएगा।

मध्यस्थ की भूमिका में पाकिस्तान की अग्निपरीक्षा वर्तमान में स्थिति यह है कि अमेरिका बातचीत की मेज पर बैठने को तैयार है, लेकिन ईरान की अनुपस्थिति ने आयोजनों की सफलता पर बड़े सवाल खड़ा कर दिए हैं। पश्चिम एशिया में लागू अस्थिर सीजफायर के बीच पाकिस्तान के लिए यह बैठक किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। यदि ईरान नहीं आता है, तो पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें विफल हो सकती हैं और उसकी वैश्विक छवि को गहरा झटका लग सकता है।

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