हल्दिया हुंकार: पीएम मोदी ने गिनाईं टीएमसी सरकार की 20 नाकामियां, ममता पर साधा सीधा निशाना
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हल्दिया: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के शंखनाद के साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। हल्दिया में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीएमसी सरकार को निर्मम करार दिया और राज्य की बदहाली के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया।

भबानीपुर में होगा नंदीग्राम जैसा हाल प्रधानमंत्री ने आत्मविश्वास के साथ दावा किया कि जिस तरह पांच साल पहले नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा था, उसी इतिहास की पुनरावृत्ति इस बार भबानीपुर में होगी। उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि बंगाल की गिरती नींव को बचाने का है।

टीएमसी पर विकास विरोधी होने का आरोप पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि जहां पूरा देश तेजी से प्रगति कर रहा है, वहीं टीएमसी की नीतियों के कारण बंगाल हर पैरामीटर पर पिछड़ गया है। उन्होंने कहा कि ममता सरकार को पीएम शब्द से इतनी नफरत है कि वे केंद्र की जनहित योजनाओं का नाम तक बदल देते हैं या उन्हें बंगाल में लागू ही नहीं होने देते।

युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ सरकारी भर्तियों में कथित लूट पर प्रहार करते हुए मोदी ने कहा कि युवाओं के सपनों को कुचला गया है। उन्होंने वादा किया कि भाजपा की सरकार बनते ही भर्तियों के लिए एक पारदर्शी कैलेंडर जारी होगा और खाली पदों को समयबद्ध तरीके से भरा जाएगा।

सिंडिकेट और कट-मनी का जाल प्रधानमंत्री ने बंगाल में व्याप्त सिंडिकेट राज और कट-मनी की संस्कृति पर भी तीखे हमले किए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिना कमीशन दिए बंगाल में कोई काम नहीं होता। उन्होंने बिहार और असम का उदाहरण देते हुए कहा कि जो राज्य मछली पालन जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भर हो रहे हैं, वहां की तुलना में बंगाल टीएमसी के कुशासन के कारण पीछे छूट गया है।

डबल इंजन ही एकमात्र समाधान पीएम मोदी ने अंत में जनता से डबल इंजन सरकार चुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि बंगाल का भला नफरत में नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य के सहयोगात्मक तालमेल में है।

टीएमसी सरकार की 20 नाकामियों पर एक नजर:

  1. नंदीग्राम जैसा सियासी पतन।
  2. निर्मम प्रशासनिक नीति।
  3. पिछड़ता बंगाल।
  4. निवेशकों का घटता भरोसा।
  5. सिंडिकेट और गुंडाराज का बोलबाला।
  6. कट-कमीशन की संस्कृति।
  7. युवाओं के भविष्य का नुकसान।
  8. निजी क्षेत्र (प्राइवेट सेक्टर) का खात्मा।
  9. सरकारी भर्तियों में घोटाला।
  10. संविधान और अदालतों की अनदेखी।
  11. स्थानीय रोजगार का अभाव।
  12. मछली पालन में आत्मनिर्भरता की कमी।
  13. जनहित योजनाओं का नाम बदलना।
  14. केंद्र की लोककल्याणकारी योजनाओं को रोकना।
  15. पारदर्शी प्रशासनिक तंत्र का अभाव।
  16. वोट बैंक के लिए धर्म आधारित आरक्षण।
  17. निवेश की संभावनाओं को खत्म करना।
  18. विकास की गति में ठहराव।
  19. पीएम शब्द के प्रति गहरी नफरत।
  20. केंद्र और राज्य के बीच समन्वय का अभाव।

हल्दिया की इस रैली ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी बंगाल चुनावों में विकास, रोजगार और भ्रष्टाचार मुख्य मुद्दे रहने वाले हैं। पीएम मोदी की इन टिप्पणियों ने राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है।

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