नई दिल्ली: भारत में इज़राइल के राजदूत रियूवेन अजार ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रही सीज़फ़ायर बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेल अवीव इस्लामाबाद को इस तरह की संवेदनशील वार्ता के लिए एक भरोसेमंद खिलाड़ी नहीं मानता।
पाकिस्तान पर क्यों नहीं भरोसा? राजदूत अजार ने कहा कि अमेरिका ने अपने कूटनीतिक कारणों से पाकिस्तान की मदद लेने का फैसला किया हो सकता है, लेकिन भारत स्थित इज़रायली मिशन का नज़रिया अलग है। उन्होंने पाकिस्तान को एक विश्वसनीय मध्यस्थ मानने से साफ इनकार कर दिया है।
ट्रंप की रणनीति से तुलना अजार ने इस स्थिति की तुलना ट्रंप प्रशासन की पुरानी रणनीतियों से की, जिसमें हमास से जुड़ी गाजा सीज़फ़ायर चर्चाओं के लिए कतर और तुर्की जैसे देशों के साथ सहयोग किया गया था। उन्होंने परोक्ष रूप से इन देशों को समस्याग्रस्त करार दिया। अजार के अनुसार, ऐसे देशों की मध्यस्थता का रिकॉर्ड सवालों के घेरे में रहता है।
लेबनान पर इज़राइल का फोकस राजदूत ने ज़ोर देकर कहा कि इज़राइल की प्राथमिकता दक्षिणी लेबनान को हिज़्बुल्लाह के आतंकवादी बुनियादी ढांचे से पूरी तरह मुक्त करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लेबनान में जारी सैन्य अभियान और ईरान के साथ होने वाली सीज़फ़ायर बातचीत अलग-अलग मुद्दे हैं। इज़राइल अपनी उत्तरी सीमा की सुरक्षा के लिए किसी भी समझौते से बंधे रहने को तैयार नहीं है।
ईरान के खिलाफ शर्तें ईरान-अमेरिका के बीच जारी ट्रूस पर टिप्पणी करते हुए अजार ने उम्मीद जताई कि यह बातचीत ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन जैसे बड़े खतरों को खत्म करने में सफल होगी। उन्होंने कहा कि इज़राइल ने इस सीज़फ़ायर का आधिकारिक समर्थन किया है, बशर्ते यह 15-पॉइंट प्लान की शर्तों पर आधारित हो।
तनाव की स्थिति वहीं, ईरान ने इज़राइल पर सीज़फ़ायर समझौते को कमजोर करने का आरोप लगाया है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि लेबनान पर हमले बंद नहीं हुए, तो होर्मुज़ स्ट्रेट में तनाव फिर से भड़क सकता है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि लेबनान के हालात मौजूदा सीज़फ़ायर समझौते की शर्तों से बाहर हैं।
#WATCH | Delhi: On Pakistan s role as a mediator, Israel s Ambassador to India, Reuven Azar, said, We don t see Pakistan as a credible player. I think that the United States has decided to use the services of the facilitation of Pakistan for their own reasons. We have seen in… pic.twitter.com/UErWPsTzzH
— ANI (@ANI) April 8, 2026
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