वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे नाजुक सीजफायर समझौते के बीच तनाव फिर से गहरा गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने तेहरान को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से नहीं खोला, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी शर्त को मानने के लिए बाध्य नहीं होंगे।
ईरान के पास नहीं है कोई बहाना हंगरी से लौटते समय वेंस ने मीडिया से साफ कहा कि अमेरिका को संकेत मिल रहे हैं कि जलडमरूमध्य को खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया, यह एक समझौता है। हम जो दे रहे हैं, उसके बदले में ईरान को जलडमरूमध्य खोलना होगा। अगर ईरानी अपनी शर्तों का पालन नहीं करते हैं, तो राष्ट्रपति ट्रंप भी हमारे वादों से पीछे हट जाएंगे।
सीजफायर में लेबनान का मुद्दा ईरान ने आरोप लगाया है कि इजरायल सीजफायर की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है, क्योंकि लेबनान में हमले जारी हैं। इस पर वेंस ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, लेबनान कभी भी इस सीजफायर डील का हिस्सा नहीं था। हमने ऐसा कोई वादा नहीं किया था। ईरान का इसे इसमें जोड़ना गलत है।
अब्बास अराघची की चुनौती ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला करते हुए अमेरिका के सामने विकल्प रखा है। उन्होंने कहा, अमेरिका को सीजफायर या इजरायल के जरिए युद्ध जारी रखने में से एक चुनना होगा। वह दोनों साथ नहीं कर सकता। दुनिया लेबनान में हो रहे नरसंहार को देख रही है।
परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की कड़ी शर्तें इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता को लेकर वेंस ने स्पष्ट कर दिया कि ट्रंप प्रशासन के पास वार्ता में सभी कार्ड हैं। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान की यूरेनियम संवर्धन क्षमता को पूरी तरह खत्म करना है। वेंस ने कहा, हमारी मांगें स्पष्ट हैं। हम नहीं चाहते कि ईरान के पास परमाणु हथियार बनाने की कोई क्षमता रहे। वे हमें जितना अधिक सहयोग देंगे, उन्हें बातचीत से उतना ही अधिक लाभ मिलेगा।
व्हाइट हाउस का रुख व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने भी दोहराया कि लेबनान सीजफायर का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि वे अगले दो हफ्तों तक इस सीजफायर प्रक्रिया में एक मददगार पार्टनर बने रहेंगे।
इस्लामाबाद में होगी आर-पार की बातचीत इस वीकेंड इस्लामाबाद में होने वाली उच्च-स्तरीय वार्ता निर्णायक साबित हो सकती है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जेडी वेंस करेंगे, जबकि ईरानी पक्ष की कमान स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ के हाथों में होगी। अब देखने वाली बात यह है कि क्या दोनों पक्ष दशकों पुरानी दुश्मनी को दरकिनार कर शांति की राह पर बढ़ पाएंगे या होर्मुज जलडमरूमध्य का तनाव एक बड़े युद्ध में बदलेगा।
The Iran–U.S. Ceasefire terms are clear and explicit: the U.S. must choose—ceasefire or continued war via Israel. It cannot have both.
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) April 8, 2026
The world sees the massacres in Lebanon. The ball is in the U.S. court, and the world is watching whether it will act on its commitments. pic.twitter.com/2bzVlHFKgi
मदद मांगी अपनों से, पर चचा ने थाम लिया हाथ: रेलवे स्टेशन का ड्रामा सोशल मीडिया पर वायरल
लोकतंत्र का महापर्व: असम, केरल और पुडुचेरी में वोटिंग शुरू, दिग्गजों की साख दांव पर
खाड़ी देशों पर निर्भरता खत्म: अरुणाचल बनेगा भारत का एनर्जी पावरहाउस , चीन को बड़ा संदेश
40 दिनों बाद अल-अक्सा में फिर गूंजी अज़ान, तनाव के बीच नाजुक सीज़फ़ायर की कठिन परीक्षा
ईरान-अमेरिका युद्धविराम: पर्दे के पीछे चीन की साइलेंट डिप्लोमेसी और ट्रंप का कबूलनामा
क्या यही है सरकारी शिक्षा का स्तर? क्लास में पढ़ाई छोड़ बच्चे से पंखा झलवाती दिखी टीचर
थलापति विजय का पलटवार: जन नायकन की रोक और तृषा संग अफेयर पर तोड़ी चुप्पी
1 रन की हार ने तोड़ा दिल: ड्रेसिंग रूम में फूट-फूटकर रो पड़े डेविड मिलर, वीडियो वायरल
दिल्ली के खिलाफ आखिरी गेंद का रोमांच: शुभमन गिल ने खोला जीत का मास्टरप्लान!
खुशियों की महफिल में कुदरत का कहर: शादी का पंडाल उड़ा ले गई तेज आंधी, वीडियो देख दहल जाएंगे आप