युद्धविराम के बाद भी सुलग रहा अमेरिका: क्या ट्रंप को कुर्सी से हटाने की हो रही तैयारी?
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अमेरिका और ईरान के बीच हुआ दो हफ्तों का युद्धविराम केवल कागजों तक ही सीमित है। सीजफायर की घोषणा के बाद भी मिसाइलें और ड्रोन हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। ईरान की सभ्यता को मिटाने की धमकी देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का अचानक शांति वार्ता के लिए मान जाना कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

ट्रंप के खिलाफ बगावत का बिगुल

युद्धविराम के चंद घंटों के भीतर ही ट्रंप अपने ही देश में घिर गए हैं। अमेरिका के 70 से अधिक सांसदों ने ट्रंप के खिलाफ महाभियोग (Impeachment) प्रस्ताव लाने की सिफारिश की है। सांसदों का तर्क है कि ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने से पहले कांग्रेस की अनुमति न लेना संवैधानिक नियमों का सीधा उल्लंघन है। व्हाइट हाउस के बाहर भी प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।

जनमत के खिलाफ था युद्ध का फैसला

एक हालिया सर्वे के अनुसार, अमेरिका की जनता ईरान के साथ युद्ध के पक्ष में नहीं थी। केवल 41 प्रतिशत लोग ही इस जंग का समर्थन कर रहे थे, जबकि 59 प्रतिशत आबादी ने इसे सिरे से खारिज किया था। अपनी जनता के रुख को नजरअंदाज कर युद्ध में उतरना ट्रंप के लिए अब राजनीतिक रूप से महंगा साबित हो रहा है।

क्या 25वें संशोधन से हटेंगे ट्रंप?

ट्रंप के विरोधियों ने अमेरिकी संविधान के 25वें संशोधन का सहारा लिया है। इसके तहत यदि उपराष्ट्रपति और कैबिनेट यह मानते हैं कि राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ हैं, तो वे उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी का दोनों सदनों में बहुमत होने के कारण इस प्रक्रिया का सफल होना तकनीकी रूप से बेहद मुश्किल है, लेकिन यह ट्रंप की घटती साख का प्रमाण जरूर है।

युद्ध की भारी कीमत और खोई प्रतिष्ठा

39 दिनों के इस युद्ध ने अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचाया है। आंकड़ों के मुताबिक:

इन सबके बावजूद ट्रंप अपने लक्ष्यों को हासिल करने में पूरी तरह नाकाम रहे। न तो ईरान का परमाणु कार्यक्रम रुका और न ही वहां का शासन बदला।

तानाशाह रवैये पर सवाल

एक राष्ट्राध्यक्ष और तानाशाह के बीच का अंतर उसके फैसलों में झलकता है। सर्वसम्मति के बजाय जिद और सनक से लिए गए ट्रंप के निर्णयों ने अमेरिका की वैश्विक छवि को धूमिल किया है। चाणक्य नीति के अनुसार, जो शासक ज्ञान को नजरअंदाज कर केवल अपनी मनमर्जी चलाता है, वह अपने राज्य के विनाश का कारण बनता है।

भ्रम फैलाने की कोशिश?

अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए ट्रंप अब सोशल मीडिया पर 15 सूत्रीय समझौते का दावा कर रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि ईरान ने उनके प्रस्तावों को दरकिनार करते हुए अपनी शर्तों पर युद्धविराम किया है। ट्रंप का यह दावा कि वे ईरान के शासन में बदलाव लाएंगे, विशेषज्ञों की नजर में केवल जनता का ध्यान भटकाने की एक कोशिश मात्र है। स्पष्ट है कि ईरान युद्ध अब ट्रंप की राजनीति के लिए गले की फांस बन चुका है।

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