दिल्ली विधानसभा की सुरक्षा में बड़ी चूक, स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने दिए सुरक्षा कवच को मजबूत करने के कड़े निर्देश
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नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा की सुरक्षा में हुई हालिया सेंध ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मोर्चा संभाल लिया है। मंगलवार को हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में उन्होंने सुरक्षा प्रोटोकॉल को पूरी तरह बदलने के निर्देश दिए हैं।

सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: विजेंद्र गुप्ता अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा में कोई भी चूक कतई स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने कहा कि घटना के दौरान विधानसभा परिसर के भीतर वाहनों की आवाजाही और अधिकारी सुरक्षा के जो इंतजाम थे, वे नाकाफी साबित हुए। उन्होंने दिल्ली पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की, लेकिन भविष्य के लिए कड़े तेवर अपनाते हुए पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

हाइड्रोलिक ब्लॉकर्स और एकीकृत कमान का फैसला सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए:

हर गेट पर सख्त पहरा, सख्ती से होगी जांच विधानसभा के अंदर प्रवेश अब पूरी तरह से नियंत्रित होगा। नए निर्देशों के तहत, प्रत्येक गेट पर दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के कम से कम दो प्रशिक्षित जवान तैनात रहेंगे, जिन्हें विशेष सुरक्षा उपकरण दिए जाएंगे। अध्यक्ष ने साफ किया है कि बिना उचित जांच और अनुमति के किसी भी व्यक्ति या वाहन का परिसर में घुसना नामुमकिन होगा।

मोबाइल पेट्रोलिंग और नियमित मॉक ड्रिल केवल गेट पर तैनाती ही काफी नहीं है, इसलिए परिसर के भीतर मोबाइल पेट्रोलिंग वाहनों को तैनात करने का निर्णय लिया गया है। ये वाहन 24 घंटे संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेंगे। साथ ही, सुरक्षा को और धार देने के लिए हर महीने मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी ताकि आपातकालीन स्थिति में सुरक्षा बलों की तैयारी को परखा जा सके।

खुफिया एजेंसियों ने भी किया आकलन मामले की गंभीरता को देखते हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के संयुक्त निदेशक नवीन वर्मा ने भी पुलिस अधिकारियों के साथ विधानसभा परिसर का दौरा किया। टीम ने मौजूदा सुरक्षा तंत्र का व्यापक मूल्यांकन किया और उन बिंदुओं की पहचान की जहां सुधार की तत्काल आवश्यकता है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने भी सुरक्षा के मद्देनजर प्रवेश द्वारों पर कोलेप्सिबल गेट लगाने का सुझाव दिया है।

साझा जिम्मेदारी का संदेश बैठक के समापन पर अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दोहराया कि विधानसभा की सुरक्षा केवल एक एजेंसी का काम नहीं, बल्कि यह एक साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आदेश दिया कि सुरक्षा समीक्षा को एक निरंतर प्रक्रिया बनाया जाए और हर छोटी चूक का रिकॉर्ड रखते हुए समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

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