ईरान की वो 10 शर्तें, जिनके आगे झुका अमेरिका! क्या सीज़फ़ायर से टलेगा विनाश?
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मध्य-पूर्व में जारी भीषण तनाव के बीच अचानक 2 हफ़्तों के सीज़फ़ायर की घोषणा ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरी समय पर ईरान पर होने वाले बड़े सैन्य हमलों को टाल दिया है। इस चौंकाने वाले यू-टर्न के पीछे तेहरान द्वारा पेश किया गया 10-सूत्रीय प्रस्ताव है।

ट्रंप का यू-टर्न: क्या था कारण? ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने अपने सभी सैन्य लक्ष्य हासिल कर लिए हैं, इसलिए युद्ध को फिलहाल विराम दिया जा रहा है। हालांकि, यह शांति स्थायी नहीं, बल्कि शर्तों पर आधारित है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह नहीं खोलता है, तो हमले दोबारा शुरू किए जा सकते हैं।

पर्दे के पीछे का खेल: पाकिस्तान की भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में एक बड़ा खुलासा पर्दे के पीछे की कूटनीति का है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर ने ट्रंप से सीधी बातचीत की और सैन्य कार्रवाई रोकने की पुरजोर अपील की। इसी कूटनीतिक दबाव के कारण अंततः दोनों देश 2 हफ़्तों के युद्ध विराम पर सहमत हुए।

ईरान का 10-सूत्रीय पीस प्लान ईरान ने जो प्रस्ताव रखा है, वह केवल युद्ध रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की नींव को प्रभावित करने वाला है। मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:

  1. इराक, लेबनान और यमन में युद्ध की तत्काल और पूर्ण समाप्ति।
  2. ईरान पर युद्ध का स्थायी समापन, जिसकी कोई समय-सीमा न हो।
  3. क्षेत्र के सभी संघर्षों का अंतिम समाधान।
  4. होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना।
  5. होर्मुज़ में आवागमन की सुरक्षा के लिए नए प्रोटोकॉल तय करना।
  6. ईरान के पुनर्निर्माण के लिए अमेरिका द्वारा पूर्ण मुआवजा भुगतान।
  7. ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की प्रतिबद्धता।
  8. अमेरिका में फ्रीज की गई ईरानी संपत्ति और फंड को रिलीज करना।
  9. ईरान द्वारा किसी भी परमाणु हथियार न बनाने का संकल्प।
  10. इन सभी शर्तों पर मुहर लगते ही सीज़फ़ायर का स्थायी शांति में बदलना।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य: असली चाबी होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया की तेल आपूर्ति का मुख्य केंद्र है। ईरान ने इसे अपनी बातचीत की सबसे बड़ी ताकत बनाया है। यह रास्ता खुलना न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जीवनदान है, बल्कि ट्रंप के लिए भी एक बड़ी राजनीतिक जीत साबित हो सकता है।

शांति या तूफान से पहले की शांति? अब तक के आंकड़ों के अनुसार, इस संघर्ष में ईरान में 1900 से अधिक, लेबनान में 1500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 13 अमेरिकी सैनिक भी शहीद हुए हैं। यह 2 हफ़्तों का समय निर्णायक है। अगर बातचीत सफल रही, तो यह इतिहास का सबसे बड़ा शांति समझौता हो सकता है। अन्यथा, यह केवल एक और बड़े और विनाशकारी युद्ध की शुरुआत का माध्यम बनेगा।

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