पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच आर्थिक कूटनीति अब खुलेआम जुबानी जंग में तब्दील हो चुकी है। जब UAE ने पाकिस्तान से अपना कर्ज वापस मांगा, तो पाकिस्तानी सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने आभार जताने के बजाय बेहद तल्ख और अजीबोगरीब बयान दे डाले। यह न केवल पाकिस्तान की आर्थिक हताशा को दर्शाता है, बल्कि पुराने दोस्तों के साथ बिगड़ते रिश्तों की कड़वाहट को भी उजागर करता है।
कर्ज लौटाने पर अहसान जताने का नाटक पाकिस्तान के लिए जब तक UAE पैसे दे रहा था, तब तक सब ठीक था। लेकिन जैसे ही UAE ने अपना पैसा वापस मांगा, सीनेटर का लहजा बदल गया। उन्होंने इसे कर्ज वापसी के बजाय एक अहसान की तरह पेश किया। सीनेटर ने तंज कसते हुए कहा कि UAE को पैसों की सख्त जरूरत है, इसलिए पाकिस्तान दरियादिली दिखाते हुए उनका पैसा लौटाकर उनकी मदद कर रहा है। एक कर्जदार का कर्जदाता को गरीब बताना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से काफी बचकाना माना जा रहा है।
बड़े भाई वाली पुरानी रट मुशाहिद हुसैन ने पुराने दिनों का राग अलापते हुए दावा किया कि UAE के निर्माण और वहां की सेना को ट्रेनिंग देने में पाकिस्तान की भूमिका रही है। खुद को बड़ा भाई बताते हुए उन्होंने कहा कि अपने छोटे भाई की मदद करना उनका फर्ज था। हालांकि, हकीकत यह है कि आज के दौर में अंतरराष्ट्रीय संबंध भावनाओं से नहीं, बल्कि मजबूत अर्थव्यवस्था और आपसी हितों से तय होते हैं, जहां पाकिस्तान फिलहाल बहुत पीछे है।
ट्रंप और युद्ध का बेतुका तर्क सीनेटर ने अपनी दलील को पुख्ता करने के लिए अमेरिका और क्षेत्रीय युद्धों को भी बीच में घसीटा। उन्होंने आरोप लगाया कि UAE ने डोनाल्ड ट्रंप को मोटी रकम दी है और वे यमन व सूडान के युद्धों में उलझे हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि इन कारणों से UAE आर्थिक संकट झेल रहा है, इसलिए उन्हें पाकिस्तान के पैसों की जरूरत आन पड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान केवल पाकिस्तानी जनता को बरगलाने के लिए दिया गया है।
अखंड भारत का डर और कूटनीतिक हताशा सबसे चौंकाने वाला बयान भारत और UAE के रिश्तों पर आया। सीनेटर ने कहा कि UAE में भारतीयों की बढ़ती आबादी के कारण भविष्य में वह अखंड भारत का हिस्सा बन सकता है। उन्होंने अबू धाबी को चेतावनी दी कि भारत का विस्तारवादी प्रभाव खाड़ी देशों तक बढ़ रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान भारत और अरब देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक और व्यापारिक दोस्ती से उपज रही पाकिस्तान की बौखलाहट का परिणाम है। पाकिस्तान इन बेतुकी बातों से भारत और UAE के बीच दरार डालने की नाकाम कोशिश कर रहा है। लेकिन कूटनीति कोरी धमकियों से नहीं, ठोस आर्थिक नीतियों से चलती है, जिसमें पाकिस्तान फिलहाल विफल नजर आ रहा है।
[Such people are called “Namak Haram.”]
— برهان الدین | Burhan uddin (@burhan_uddin_0) April 6, 2026
Senator Mushahid Hussain mocked the UAE on TV for asking Pakistan to repay its loans, even claiming Dubai “needs money because Iran ruined its economy.”
Despite the UAE giving Pakistan billions in aid and loans, this Namak Haram attitude… pic.twitter.com/0CZU91CP61
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