बांग्लादेश में खसरे का कहर: 19 दिनों में 94 बच्चों की मौत, सरकार ने इसे बताया यूनुस युग की विफलता
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बांग्लादेश इस समय स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति से जूझ रहा है। देश में फैले खसरे (Measles) के घातक प्रकोप ने पिछले 19 दिनों के भीतर 94 बच्चों की जान ले ली है। इस बीमारी ने देश के 64 में से 56 प्रशासनिक जिलों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे पूरे स्वास्थ्य तंत्र में हड़कंप मच गया है।

तारिक रहमान सरकार का आपातकालीन कदम हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार ने युद्धस्तर पर आपातकालीन टीकाकरण अभियान शुरू किया है। स्वास्थ्य मंत्री सरदार शखावत हुसैन बकुल ने जानकारी दी कि देश के 30 सबसे अधिक प्रभावित इलाकों को चिह्नित कर टीकाकरण का काम शुरू कर दिया गया है। जल्द ही इसे पूरे देश में विस्तारित किया जाएगा।

मोहम्मद यूनुस पर लापरवाही के आरोप मौजूदा सरकार ने इस संकट के लिए सीधे तौर पर मोहम्मद यूनुस की पूर्व अंतरिम सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। आरोप है कि यूनुस सरकार का ध्यान जनस्वास्थ्य के बजाय केवल राजनीतिक प्रतिशोध और शेख हसीना सरकार के कार्यों को पलटने पर केंद्रित था। समय पर टीकों की खरीद न करना इस बड़ी त्रासदी का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।

आंकड़ों में खौफनाक तस्वीर स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के अनुसार, केवल पिछले 24 घंटों में 10 बच्चों की मौत हुई है। 19 दिनों में 6 महीने से 5 साल तक के बच्चों में संदिग्ध खसरे के 5,792 मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कई मामलों की रिपोर्टिंग नहीं हो पा रही है, इसलिए वास्तविक मौत का आंकड़ा इन सरकारी आंकड़ों से भी कहीं अधिक हो सकता है।

टीकाकरण कार्यक्रम क्यों पटरी से उतरा? जानकारों के मुताबिक, जून 2024 में प्रस्तावित टीकाकरण अभियान देश में हुए राजनीतिक विद्रोह के कारण टल गया था। इसके बाद आई अंतरिम सरकार ने टीकों के लिए फंड तो आवंटित किए, लेकिन उन्हें खरीदने या समय पर वितरण करने में पूरी तरह विफल रही। जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ ताजुल इस्लाम ए बारी ने इस स्थिति को बेहद भयावह करार दिया है।

क्या होता है खसरा और इसका खतरा? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, खसरा दुनिया की सबसे संक्रामक बीमारियों में से एक है। यह हवा के जरिए तेजी से फैलती है। हालांकि यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है, लेकिन 5 साल से कम उम्र के बच्चे इसके सबसे बड़े शिकार होते हैं। इस बीमारी का कोई सीधा इलाज नहीं है, इसलिए समय पर टीकाकरण ही एकमात्र बचाव है।

वर्तमान में बांग्लादेश में उपजी यह स्थिति एक गंभीर चेतावनी है कि कैसे राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य और उनके जीवन पर पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि टीकाकरण अभियान को तेजी से पूरा नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह स्थिति और भी अधिक भयावह हो सकती है।

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