विडंबना की पराकाष्ठा: युद्ध की आग में घी डाल रहे रूबियो और ट्रंप, ईसा मसीह के नाम का सहारा क्यों?
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ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का एक वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है। इसमें वे ईसा मसीह के पुनर्जन्म और उनके बलिदान की कहानी सुनाते नजर आ रहे हैं। एक तरफ दुनिया युद्ध की विभीषिका झेल रही है, तो दूसरी तरफ रूबियो का यह उपदेश कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

धर्म का सहारा, युद्ध का एजेंडा विदेशी मामलों के विशेषज्ञ इसे ध्यान भटकाने की रणनीति मान रहे हैं। जिस समय रूबियो शांति का पाठ पढ़ा रहे हैं, उसी समय उनके प्रशासन के फैसले सैन्य आक्रामकता को बढ़ावा दे रहे हैं। यह विडंबना ही है कि जो व्यक्ति युद्ध का निर्णय लेने वालों में शामिल है, वही ईसा मसीह के प्रेम और शांति के संदेश का उपयोग अपनी नीति को ढंकने के लिए कर रहा है।

पोप की अपील को अनसुना करना हाल ही में पोप ने ईस्टर के अवसर पर स्पष्ट शब्दों में दुनिया भर के नेताओं से आह्वान किया कि वे हथियारों को त्याग दें और बलपूर्वक थोपी गई शांति के बजाय संवाद का मार्ग चुनें। लेकिन रूबियो और ट्रंप प्रशासन ने इस अपील को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। क्या धर्म गुरुओं की शांति की अपील महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है?

ट्रंप का अल्हम्दुलिल्लाह और राजनीति ट्रंप ने हाल ही में ईरान को धमकाते हुए अल्हम्दुलिल्लाह (ईश्वर का शुक्र है) शब्द का व्यंग्यात्मक उपयोग किया। इसके तुरंत बाद रूबियो का ईसा मसीह वाला वीडियो शेयर करना महज एक संयोग नहीं लगता। ऐसा प्रतीत होता है कि अमेरिका ईरान के साथ इस संघर्ष को धार्मिक युद्ध का रंग देने की कोशिश कर रहा है, ताकि घरेलू राजनीति में अपना वोट बैंक सुरक्षित रखा जा सके।

व्हाइट हाउस की प्रार्थना सभाएं: दिखावा या हकीकत? यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप प्रशासन ने धर्म का सार्वजनिक प्रदर्शन किया है। मार्च में ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पादरियों को बुलाकर अपने लिए प्रार्थना करवाई थी। पादरियों ने ट्रंप के लिए दैवीय समझदारी की दुआ मांगी थी। सवाल यह है कि क्या ट्रंप और रूबियो ने उस प्रार्थना का अर्थ समझा? क्या ईसा मसीह का संदेश किसी दूसरे देश में तबाही मचाने या युद्ध को बढ़ावा देने की अनुमति देता है?

बदलती वैश्विक स्थिति और दांव रूस-यूक्रेन से लेकर मध्य-पूर्व तक, दुनिया हर दिन खून से रंजित हो रही है। आम लोग भूखमरी की कगार पर हैं और शक्तिशाली देश अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं। अमेरिका में भी इस युद्ध के खिलाफ जनता सड़कों पर है। ऐसे में धर्म का इस्तेमाल करके जनता का ध्यान भटकाना राजनीति का पुराना हथियार बन चुका है।

क्या मार्को रूबियो और डोनाल्ड ट्रंप वाकई ईसा मसीह के संदेश को समझ रहे हैं, या यह केवल सत्ता के गलियारों में अपनी गलत नीतियों पर पर्दा डालने का एक विफल प्रयास है? इतिहास गवाह है कि धर्म के नाम पर छेड़े गए युद्धों ने कभी किसी का भला नहीं किया, केवल विनाश की इबारत लिखी है।

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