ईरान की चेतावनी: बुशेहर परमाणु संयंत्र पर हमले से GCC देशों में मच सकता है रेडियोएक्टिव हाहाकार
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ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान के बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हुए ताजा हमलों ने न केवल क्षेत्र की सुरक्षा बल्कि परमाणु आपदा के खतरे को भी बढ़ा दिया है।

परमाणु रिसाव का खतरा और ईरान की सीधी चेतावनी ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस को पत्र लिखकर इन हमलों की कड़ी निंदा की है। अराघची का कहना है कि बुशेहर संयंत्र पर अब तक चार बार हमले हो चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इन हमलों के कारण रेडियोएक्टिव रिसाव (फॉलआउट) होता है, तो इसका सबसे भयानक असर तेहरान पर नहीं, बल्कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों की राजधानियों पर पड़ेगा।

IAEA की चिंता, सुरक्षा टीम के सदस्य की मौत इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने इन हमलों की पुष्टि की है। शनिवार सुबह संयंत्र परिसर के पास एक प्रोजेक्टाइल गिरा, जिससे सुरक्षा टीम के एक सदस्य की मौत हो गई और एक इमारत को नुकसान पहुंचा। IAEA के प्रमुख राफेल मारिआनो ग्रॉसी ने चेतावनी दी है कि परमाणु संयंत्र और उसके आसपास के बुनियादी ढांचे को किसी भी हाल में सैन्य हमलों का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। फिलहाल, रेडिएशन के स्तर में कोई वृद्धि दर्ज नहीं की गई है।

रूस ने निकाले अपने 198 विशेषज्ञ हालात की गंभीरता को देखते हुए रूस ने बड़ा कदम उठाया है। रूसी परमाणु कंपनी रोसाटॉम ने बुशेहर संयंत्र से अपने 198 कर्मचारियों को सुरक्षित निकाल लिया है। रोसाटॉम प्रमुख अलेक्सी लिखाचेव ने स्पष्ट किया कि स्थिति सबसे खराब संभावित परिदृश्य की ओर बढ़ रही है। फरवरी के अंत से ही रूस अपने नागरिकों को वहां से निकालने की प्रक्रिया में जुटा है।

पेट्रोकेमिकल केंद्रों पर भी हमले ईरान ने आरोप लगाया है कि परमाणु संयंत्र के अलावा माहशाहर और बंदर इमाम जैसे प्रमुख पेट्रोकेमिकल केंद्रों को भी निशाना बनाया गया है। ईरान का दावा है कि ये हमले महज सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि उनके आर्थिक ढांचे को पूरी तरह नष्ट करने की सोची-समझी साजिश हैं।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर रूस की भूमिका रूस ने इन हमलों को गैरकानूनी और लापरवाह करार दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दुनिया अब किसी भी नियम या सीमा को नहीं मान रही है। मास्को ने यह भी घोषणा की है कि वह 27 अप्रैल को होने वाले समीक्षा सम्मेलन में इन हमलों से परमाणु अप्रसार संधि (NPT) को हुए नुकसान का मुद्दा मजबूती से उठाएगा।

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