ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा भू-राजनीतिक संघर्ष अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। फारस की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित करने के बाद, अब ईरान की नजरें लाल सागर के मुहाने बाब-अल-मंदेब पर टिकी हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अपने समर्थित हूती विद्रोहियों के जरिए इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को बंद करने की साजिश रच रहा है।
अरबी भाषा में बाब-अल-मंदेब का अर्थ होता है दुखों का द्वार (Gate of Tears)। यह महज 26 से 30 किलोमीटर चौड़ा एक रणनीतिक जलमार्ग है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। आज यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है, क्योंकि वैश्विक व्यापार का लगभग 12 से 15 प्रतिशत हिस्सा यहीं से होकर गुजरता है।
यदि ईरान इस रास्ते को बंद करने में सफल हो जाता है, तो स्वेज नहर से होने वाला व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा। यह अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक चेकमेट जैसी स्थिति होगी, जिसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
ईरान सीधे तौर पर इस जलडमरूमध्य की सीमा पर नहीं है, लेकिन यमन में सक्रिय हूती विद्रोही पूरी तरह से तेहरान के इशारे पर काम कर रहे हैं। हूतियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे आधुनिक ड्रोन और एंटी-शिप मिसाइलें अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय युद्धपोतों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
इस संकरे रास्ते की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां से गुजरने वाले विशालकाय जहाजों को जमीन से निशाना बनाना बेहद आसान है। ईरान का मुख्य उद्देश्य स्वेज नहर के प्रवेश द्वार पर अपना वर्चस्व स्थापित करना है, जिससे वे पश्चिमी देशों पर भारी दबाव बना सकें।
इस रास्ते के बंद होने का सबसे बुरा असर भारत, चीन और यूरोप के देशों पर पड़ेगा। भारत का यूरोप के साथ होने वाला अधिकांश व्यापार इसी मार्ग से होता है।
अगर यह रास्ता बंद होता है, तो जहाजों को अफ्रीका का चक्कर लगाकर केप ऑफ गुड होप से जाना होगा। इससे यात्रा के समय में 15 से 20 दिनों की बढ़ोतरी होगी और शिपिंग लागत व ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। नतीजतन, दुनिया भर में महंगाई बेकाबू हो सकती है, और भारत में कच्चा तेल व एलपीजी की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
ट्रंप प्रशासन ने पहले ही चेतावनी दी है कि वे बाब-अल-मंदेब को इंटरनेशनल वाटर्स के रूप में सुरक्षित रखने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। पेंटागन इस क्षेत्र में अपनी नौसैनिक उपस्थिति बढ़ा रहा है, लेकिन हूतियों के छद्म युद्ध को रोकना एक बड़ी सामरिक चुनौती बना हुआ है। अब देखना यह है कि क्या यह दुखों का द्वार वास्तव में वैश्विक संघर्ष का नया केंद्र बनेगा या अमेरिका इसे खुलने के लिए मजबूर कर पाएगा।
JUST IN 🇮🇷🇺🇸: Iran Hints at CLOSING the Bab-el-Mandeb Strait Next
— Ryan Rozbiani (@RyanRozbiani) April 3, 2026
This would be with the help of Yemen, and would further hurt the global economy
Iran’s Parliament Speaker Ghalibaf:
What share of global oil, LNG, wheat, rice, and fertilizer shipments transits the Bab-el-Mandeb… https://t.co/Q7AFCajL1G pic.twitter.com/iefOaPOf0r
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