पूर्व अमेरिकी सैनिक का खौफनाक सच: यूएई के लिए बने भाड़े के हत्यारे , हर महीने कमाए 10 करोड़
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क्या था स्पीयर ऑपरेशंस ग्रुप ? रूस के वैगनर ग्रुप की तरह ही अब एक अमेरिकी निजी सैन्य कंपनी स्पीयर ऑपरेशंस ग्रुप चर्चा में है। इस कंपनी की स्थापना अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक अब्राहम गोलन और पूर्व नेवी सील इसैक गिलमोर ने की थी। आरोप है कि यह कंपनी महज सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के लिए टारगेटेड असैसिनेशन (लक्षित हत्याएं) करने के लिए बनाई गई थी।

योजनाबद्ध तरीके से हत्याओं का सौदा अदालती दस्तावेजों के अनुसार, यूएई ने अपने राजनीतिक विरोधियों को ठिकाने लगाने के लिए इस ग्रुप के साथ समझौता किया था। इसके बदले उन्हें हर महीने 15 लाख डॉलर (लगभग 10 करोड़ रुपये) का भुगतान किया जाता था। सफल हत्याओं के लिए इन्हें अतिरिक्त बोनस भी मिलता था। कंपनी में काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारी पूर्व अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज के सदस्य थे।

यमन के सांसद को मारने की साजिश यमन के सांसद अंसाफ अली मायो ने इन पूर्व सैनिकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मायो का कहना है कि 2015 में उन्हें मारने की साजिश रची गई थी। 29 दिसंबर 2015 को उनके दफ्तर में बम लगाया गया था। मायो धमाके से ठीक पहले वहां से निकलने में कामयाब रहे, जिसके बाद उन्हें देश छोड़कर सऊदी अरब में शरण लेनी पड़ी। उन्होंने अब इन सैनिकों पर युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध का मुकदमा दर्ज कराया है।

साजिशकर्ताओं ने खुद कबूला अपना गुनाह हैरानी की बात यह है कि मुख्य आरोपी अब्राहम गोलन ने खुद एक इंटरव्यू में इन आरोपों को स्वीकार किया है। गोलन ने कहा, यमन में एक टारगेटेड असैसिनेशन प्रोग्राम चल रहा था जिसे मैं चला रहा था। हमने जो भी किया, वह यूएई की मंजूरी से किया गया था। गोलन के साथ डेल कॉमस्टॉक जैसे अन्य पूर्व स्पेशल फोर्सेज के सदस्यों ने भी अपनी भूमिका स्वीकार की है।

कानूनी घेरे में पूर्व अमेरिकी सैनिक हालांकि मायो अमेरिका के नागरिक नहीं हैं, लेकिन एलियन टॉर्ट स्टेचू कानून के तहत उन्हें अमेरिकी अदालत में मुकदमा करने की अनुमति मिल गई है। संस्थाओं का कहना है कि यह मुकदमा इसलिए जरूरी है ताकि उन पूर्व सैनिकों को जवाबदेह ठहराया जा सके, जो अपने सैन्य प्रशिक्षण का इस्तेमाल अवैध हत्याओं के लिए कर रहे हैं।

यूएई का इनकार दूसरी ओर, यूएई ने राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाने के इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज किया है। हालांकि, यूएई ने यह माना है कि वह यमन में आतंकवाद विरोधी अभियानों का समर्थन करता रहा है। लेकिन जानकारों का मानना है कि अल-इस्लाह जैसे राजनीतिक गुटों को आतंकवादी करार देकर उन्हें खत्म करने की यह एक सोची-समझी नीति थी।

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