अंतरिक्ष से हमारी पृथ्वी बेहद खूबसूरत और शांत दिखाई देती है। हाल ही में आर्टेमिस II मिशन के दौरान नासा के अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की ओर बढ़ते हुए पृथ्वी की अद्भुत तस्वीरें ली हैं। 1969 के बाद पहली बार मानव मिशन ने इतनी स्पष्ट तस्वीरें कैद की हैं, जो अब चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
जब हम 1969 की तस्वीरों और आज की तस्वीरों की तुलना करते हैं, तो एक बड़ा अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। पुरानी तस्वीरों में पृथ्वी का नीला और स्वच्छ रंग ज्यादा प्रभावशाली लगता था, जबकि 2026 की तस्वीरों में एक हल्का पीलापन और धुंधलापन महसूस होता है। विशेषज्ञ इसे बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के सीधे संकेत के रूप में देख रहे हैं।
अपोलो रिमास्टर्ड के लेखक एंडी सौंडर्स ने 1972 के अपोलो 17 मिशन और 2026 के आर्टेमिस II मिशन की तस्वीरों को आमने-सामने रखा है। उन्होंने दुनिया से एक मार्मिक सवाल पूछा: आधी सदी के फासले के बाद, क्या बदला है? यह तुलना साबित करती है कि इंसान की गतिविधियों ने हमारे ग्रह के बाहरी स्वरूप को भी प्रभावित किया है।
नासा के कमांडर रीड वाइजमैन और उनके दल ने पृथ्वी से लगभग 1,60,000 किलोमीटर दूर से ये तस्वीरें ली हैं। तस्वीरों में महासागरों के ऊपर बादलों की सफेद परतें और वायुमंडल में चमकती ग्रीन अरोरा (उत्तरी रोशनी) दिखाई दे रही है। वाइजमैन ने इसे अपने जीवन का सबसे स्तब्ध कर देने वाला क्षण बताया।
आर्टेमिस II मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। यह दल ओरियन कैप्सूल के जरिए चंद्रमा का चक्कर लगाकर वापस लौटेगा। 1972 के बाद यह पहली बार है जब मानव चंद्रमा की इतनी करीब से परिक्रमा कर रहा है। मिशन अब अपने मुख्य पड़ाव की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
हालांकि अंतरिक्ष में शांति और विज्ञान की बात हो रही है, लेकिन धरती पर स्थितियां अलग हैं। एक ओर जहां नासा के बजट और भविष्य के मिशनों को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ी है, वहीं ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक हलकों में चिंता पैदा कर दी है। इन भू-राजनीतिक मोर्चों पर चल रही खींचतान का असर वैज्ञानिक अनुसंधानों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी पड़ने की आशंका बनी हुई है।
We see our home planet as a whole, lit up in spectacular blues and browns. A green aurora even lights up the atmosphere. That s us, together, watching as our astronauts make their journey to the Moon. pic.twitter.com/6JkKufBgtJ
— NASA (@NASA) April 3, 2026
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