दुनियाभर के शेयर बाजारों में इन दिनों भारी उथल-पुथल मची है। ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। ऐसे में कई लोग पैनिक में आकर गलत फैसले ले रहे हैं। इस कठिन दौर में ज़ेरोधा के प्रमुख नितिन कामथ ने निवेशकों को संयम रखने और एक खास रणनीति अपनाने की सलाह दी है।
कामथ ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि निवेश जितना आसान दिखता है, असल में उतना है नहीं। किसी पोर्टफोलियो का सही प्रदर्शन नापना एक चुनौतीपूर्ण काम है। इसमें केवल शेयर की कीमत ही नहीं, बल्कि कैश फ्लो, डिविडेंड, बोनस शेयर और स्टॉक स्प्लिट जैसे कई तकनीकी पहलू जुड़े होते हैं। इन जटिलताओं को समझे बिना जल्दबाजी में फैसला लेना नुकसानदेह हो सकता है।
ग्लोबल स्तर पर ईरान-इजरायल तनाव और अनिश्चितता ने निवेशकों के भरोसे को डगमगा दिया है। तेल की कीमतों में उछाल महंगाई बढ़ने का संकेत है, जिसका सीधा असर भारत के निफ्टी 50 जैसे प्रमुख सूचकांकों पर पड़ रहा है। हालात इतने अनिश्चित हैं कि सोने जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों में भी स्थिरता नहीं दिख रही है। बढ़ रही बॉन्ड यील्ड यह बता रही है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं।
नितिन कामथ के अनुसार, इस अनिश्चितता से बचने का एकमात्र अचूक फॉर्मूला डाइवर्सिफिकेशन (विविधीकरण) है। उनका कहना है कि अपना पैसा किसी एक सेक्टर या एसेट क्लास में लगाने के बजाय उसे अलग-अलग क्षेत्रों में बांट देना चाहिए।
कामथ के अनुसार, डाइवर्सिफिकेशन से मिलता है:
कामथ की स्पष्ट सलाह है कि कोई भी यह भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि कल बाजार में क्या होगा। ऐसे में सबसे समझदारी भरा कदम यही है कि आप अपने पोर्टफोलियो को बैलेंस रखें और बाजार की गिरावट को देखकर घबराएं नहीं।
बाजार के उतार-चढ़ाव को अपनी निवेश रणनीति का हिस्सा बनाएं। अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो डाइवर्सिफिकेशन का यह मंत्र ही आपको डूबने से बचाएगा और भविष्य में धन सृजन में आपकी मदद करेगा।
The account performance graph on Console may look just like a simple chart, and I wouldn t fault anyone to think so.
— Nithin Kamath (@Nithin0dha) April 2, 2026
But in reality, the sheer number of edge-cases with payout/payin of funds and stocks, corporate actions, etc., took enormous engineering effort to get right.… pic.twitter.com/L62iCYcFNO
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