7.71 लाख करोड़ खर्च करके भी चांद पर कदम क्यों नहीं रखेंगे NASA के अंतरिक्ष यात्री?
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अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने अपने बहुप्रतीक्षित आर्टेमिस II मिशन को लॉन्च कर दिया है। फ्लोरिडा से उड़ान भरने वाले इस मिशन में 4 अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जिन्होंने 3 साल की कड़ी ट्रेनिंग ली है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि अरबों डॉलर खर्च करने के बावजूद ये यात्री चांद की सतह पर क्यों नहीं उतरेंगे?

मिशन का असली मकसद: उतरना नहीं, परखना है

नासा का आर्टेमिस II मिशन चांद पर उतरने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की तैयारियों के लिए है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ओरियन स्पेसक्राफ्ट और एसएलएस (SLS) रॉकेट का लाइफ सपोर्ट सिस्टम गहरे अंतरिक्ष में सुरक्षित रूप से काम कर रहा है या नहीं। यह एक टेस्ट ड्राइव की तरह है, जो भविष्य के बेस कैंप के लिए रास्ता साफ करेगा।

क्यों खर्च किए जा रहे हैं अरबों डॉलर?

नासा का यह मिशन एक लंबी प्लानिंग का हिस्सा है। पिछले साल आर्टेमिस I ने बिना चालक दल के रॉकेट का परीक्षण किया था। अब आर्टेमिस II इंसानों के साथ सिस्टम की क्षमता जांचेगा। नासा का लक्ष्य चंद्रमा पर एक स्थायी बेस बनाना है, ताकि भविष्य में मंगल ग्रह तक का सफर आसान हो सके। बिना इन परीक्षणों के सीधे चांद पर उतरना जोखिम भरा हो सकता है।

कब होगा मून लैंडिंग का सपना पूरा?

नासा की योजना चरणबद्ध है। आर्टेमिस II के बाद, आर्टेमिस III मिशन पृथ्वी की कक्षा में डॉकिंग की टेस्टिंग करेगा। जबकि चंद्रमा की सतह पर इंसानों के कदम रखने का ऐतिहासिक क्षण 2028 में आर्टेमिस IV मिशन के जरिए आएगा। तब तक ये यात्री चांद के चक्कर लगाकर वापस लौटेंगे।

बजट और सुरक्षा: पहली प्राथमिकता

आर्टेमिस कार्यक्रम पर 2025 तक लगभग 93 अरब डॉलर (करीब 7.71 लाख करोड़ रुपये) खर्च होने का अनुमान है। यह पैसा सरकारी फंड से आता है और बोइंग, लॉकहीड मार्टिन जैसी कंपनियां इसमें तकनीक उपलब्ध कराती हैं। नासा के अधिकारियों के अनुसार, इस मिशन की सबसे बड़ी सफलता अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित और स्वस्थ वापस पृथ्वी पर लाना है।

मानवता के लिए नया कीर्तिमान

यह मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि ये 4 अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से लगभग 4 लाख किलोमीटर दूर जाएंगे। मानव इतिहास में आज तक कोई भी इंसान पृथ्वी से इतनी दूर नहीं गया है। आर्टेमिस II न केवल चंद्रमा के रहस्यों को समझने की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाने की नासा की महत्वाकांक्षी योजना की नींव भी है।

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