बिहार की राजनीति में एक बड़े अध्याय का समापन हुआ है। मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने राज्यसभा की सदस्यता लेने के बाद बिहार विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है। इस बदलाव ने न केवल राज्य के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि उनके करीबियों को भी भावुक कर दिया है।
इस्तीफे के बाद छलके आंसू नीतीश कुमार के इस कदम के बाद उनके समर्थक और पार्टी नेता मायूस दिखे। राज्य के मंत्री और जेडीयू नेता अशोक चौधरी इस दौरान काफी भावुक नजर आए। मीडिया से बात करते हुए उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का विकल्प मिलना नामुमकिन है।
वे कोई सामान्य व्यक्ति नहीं थे अशोक चौधरी ने नीतीश कुमार की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे। उन्होंने हर विभाग पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी थी। चौधरी ने याद किया कि चाहे वे कांग्रेस में रहे हों या जेडीयू में, नीतीश कुमार ने हमेशा उन्हें सम्मान दिया। कोरोना काल के कठिन समय में दोनों के बीच के संबंध और भी प्रगाढ़ हुए थे।
विकास की लकीर और अगली चुनौती मंत्री ने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार ने बिहार के विकास के लिए जो खाका खींचा है, उसे आगे बढ़ाना किसी के लिए भी एक बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने कहा, उनके बाद जो भी आएगा, उसके लिए कार्य का स्तर बनाए रखना आसान नहीं होगा।
चौधरी ने यह भी साफ किया कि नीतीश कुमार अब भी जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वे दिल्ली और पटना के बीच तालमेल बिठाते रहेंगे और राज्य सरकार को उनका मार्गदर्शन मिलता रहेगा।
समाज सुधारक के रूप में याद किए जाएंगे अशोक चौधरी ने नीतीश कुमार की तुलना विद्यासागर और मदन मोहन मालवीय जैसे महान समाज सुधारकों से की। उन्होंने कहा कि विधानसभा में भले ही अब उनकी उपस्थिति न हो, लेकिन उनका राजनीतिक मार्गदर्शन हमेशा पार्टी और बिहार के साथ बना रहेगा।
आगे क्या होगा? विधानसभा से इस्तीफे के बाद अब राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हैं कि मुख्यमंत्री पद का उत्तराधिकारी कौन होगा। हालांकि, जेडीयू के नेताओं का कहना है कि संवैधानिक प्रावधान के अनुसार, एक मुख्यमंत्री बिना सदन का सदस्य रहे भी छह महीने तक पद पर बना रह सकता है। फिलहाल, जेडीयू और बीजेपी के बीच गठबंधन के समीकरणों पर सबकी नजरें टिकी हैं।
*#WATCH पटना: बिहार सरकार के मंत्री और JDU नेता अशोक चौधरी ने कहा, विकास की जो लाइन नीतीश कुमार ने खींची है। उनके बाद जो भी आएगा उसके लिए एक बड़ी चुनौती होगी...वे हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष रहेंगे। सदन चलेगा तब दिल्ली जाएंगे, वरना बिहार में रहेंगे। उनके मार्गदर्शन में सरकार… pic.twitter.com/hhtRIwxYz5
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 30, 2026
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