RBI के हस्तक्षेप के बावजूद रुपया पस्त: पहली बार 95 के नीचे फिसला भारतीय मुद्रा
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बड़ी राहत के बाद फिर हावी हुई डॉलर की ताकत भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रुपए को सहारा देने के लिए उठाए गए कदमों के बावजूद, सोमवार को मुद्रा बाजार में भारी उथल-पुथल देखी गई। सोमवार सुबह रुपया 122 पैसे की जोरदार बढ़त के साथ 93.57 के स्तर पर खुला था, लेकिन यह तेजी बरकरार नहीं रह सकी। दिन के कारोबार में रुपया अपने ऊपरी स्तर से 88 पैसे फिसलकर पहली बार 95.14 प्रति डॉलर के निचले स्तर तक पहुंच गया।

RBI ने क्या बदला नियम? रुपए में जारी एकतरफा गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई ने बैंकों के लिए नेट ओपन पोजिशन पर लगाम कस दी है। नई गाइडलाइंस के तहत, बैंकों के लिए नेट ओपन पोजिशन की लिमिट को 100 मिलियन डॉलर पर कैप कर दिया गया है। 10 अप्रैल से सभी बैंकों को अनिवार्य रूप से इस नियम का पालन करना होगा।

क्यों लिया गया यह सख्त फैसला? केंद्रीय बैंक का मानना है कि बैंक करेंसी मूवमेंट पर अत्यधिक दांव (Exposure) लगा रहे हैं। कई बैंक डॉलर की मजबूती के फेवर में बेट लगा रहे थे, जिससे भारतीय मुद्रा पर दबाव और बढ़ रहा था। इस सट्टेबाजी को रोकने और बाजार में स्थिरता लाने के लिए आरबीआई ने यह कड़ा कदम उठाया है।

बैंकों को 4,000 करोड़ के नुकसान का डर बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि अभी बैंकों का कुल ऑनशोर फॉरेक्स एक्सपोजर लगभग 35-40 बिलियन डॉलर है। नए नियम के कारण बैंकों को अपनी पोजिशन अनवाइंड करनी होगी, जिससे उन्हें करीब 4,000 करोड़ रुपए का वित्तीय नुकसान हो सकता है।

राहत की मांग और लिक्विडिटी का संकट बैंकों ने आरबीआई से इस नियम को लागू करने के लिए 3 महीने की मोहलत मांगी है। बैंकों का तर्क है कि यदि पोजीशन को अचानक (Disorderly) अनवाइंड किया गया, तो बाजार में लिक्विडिटी क्रंच यानी नकदी का संकट पैदा हो सकता है। बैंकों का सुझाव है कि पोजिशन को उनकी मैच्योरिटी तक अनवाइंड होने दिया जाए।

आगे क्या है रुपए का आउटलुक? विशेषज्ञों के अनुसार, रुपए पर दबाव की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें हैं। एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी एंड करेंसी एक्सपर्ट जतिन प्रसाद का मानना है कि जब तक क्रूड में तेजी बनी रहेगी, रुपए का सेंटिमेंट कमजोर ही रहेगा। तकनीकी तौर पर 94 का स्तर अब रेजिस्टेंस बन गया है, जबकि 95 पर फिलहाल सपोर्ट नजर आ रहा है।

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