खुद को संभाल न सके, चले हैं दुनिया बचाने: होर्मुज पर पाक की फ्लॉप डिप्लोमेसी
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क्या वाकई पाक ने ली गिरते हुए कूटनीति की जिम्मेदारी? पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार का हालिया फिसलना महज एक शारीरिक घटना नहीं, बल्कि उनकी वैश्विक कूटनीति का सटीक आईना बन गया है। सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों का स्वागत करते हुए डार का मंच पर गिरना उस पाकिस्तान की बदहाली को दर्शाता है, जो खुद आर्थिक और राजनीतिक भूचाल से जूझ रहा है और दुनिया के सबसे बड़े युद्ध को रुकवाने का चौधरी बनने का सपना देख रहा है।

इस्लामाबाद की हाई-प्रोफाइल बैठक: दिखावा ज्यादा, असर शून्य रविवार को इस्लामाबाद में एक बड़ी बैठक हुई, जिसका मकसद ईरान-अमेरिका युद्ध को थामना और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाना था। इसमें सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान, तुर्किये के हाकन फिदान और मिस्र के बद्र अब्देलत्ती शामिल हुए। दावा किया गया कि यह बैठक विश्व युद्ध को टाल देगी, लेकिन नतीजा वही रहा—बेअसर। युद्ध की आग ठंडी होने के बजाय और भड़क गई है।

मिस्र का नया दांव: होर्मुज बनेगा नया स्वेज? बैठक के दौरान एक अहम प्रस्ताव निकलकर आया। मिस्र ने सुझाव दिया है कि स्वेज नहर की तर्ज पर होर्मुज में भी फीस वसूलने वाला एक कंसोर्टियम बनाया जाए। तुर्किये, मिस्र और सऊदी अरब इस पर विचार कर रहे हैं और पाकिस्तान को भी इसमें न्यौता दिया है। हालांकि, अमेरिका और ईरान जैसे मुख्य खिलाड़ी इस पहल पर चुप्पी साधे हुए हैं। पाक सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से संपर्क में हैं, लेकिन धरातल पर कोई हल निकलता नहीं दिख रहा है।

पाकिस्तान की कामयाबी का पैमाना सिर्फ 20 जहाज इस पूरी कवायद का आखिरी नतीजा क्या निकला? पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने बड़ी गर्व से बताया कि ईरान ने उनके 20 जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है। यानी, दुनिया को शांति का पाठ पढ़ाने वाली यह बैठक सिर्फ पाकिस्तान के निजी स्वार्थों को साधने तक सिमट कर रह गई। वैश्विक शांति का वादा ठंडे बस्ते में है और युद्ध का मूल कारण जस का तस बना हुआ है।

ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ती खाई इस बैठक में युद्ध के मुख्य पक्ष—अमेरिका और इजरायल—मौजूद ही नहीं थे। ईरान ने अमेरिका द्वारा भेजे गए 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान ने अपने 5-सूत्रीय एजेंडे में साफ कर दिया है कि जब तक उसके अधिकारियों की हत्याएं बंद नहीं होंगी और होर्मुज पर उसके संप्रभु अधिकारों को नहीं माना जाएगा, तब तक कोई समझौता संभव नहीं है।

जमीनी हकीकत: कूटनीति की मेज पर बातें, सरहदों पर मिसाइलें जब इस्लामाबाद में कूटनीति की बातें चल रही थीं, तब इजरायल और ईरान के बीच मिसाइलों का आदान-प्रदान जारी था। अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने अतिरिक्त मरीन और पैराट्रूपर्स तैनात कर दिए हैं। एक तरफ वाशिंगटन बिना जमीनी सेना के लक्ष्य हासिल करने का दम भर रहा है, तो दूसरी तरफ युद्ध का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान की यह कोशिश एक तमाशा बनकर रह गई है, जिसने यह साबित कर दिया है कि जिनके अपने घर ढह रहे हों, वे दुनिया की इमारत को सहारा नहीं दे सकते।

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