ईरान के हमले में दो टुकड़ों में बंटा अमेरिकी AWACS, मिडिल ईस्ट में मची खलबली
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ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा संघर्ष अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर तैनात एक अमेरिकी AWACS एयरक्राफ्ट को निशाना बनाकर उसे दो टुकड़ों में तोड़ दिया है।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ने इस हमले की तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों में विमान का पिछला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त दिख रहा है। ईरान का दावा है कि इस हमले ने अमेरिका के अभेद्य एयर डिफेंस सिस्टम की पोल खोल दी है और यह साबित कर दिया है कि अमेरिका अपने सबसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों की रक्षा करने में भी विफल है।

मिडिल ईस्ट में अमेरिका की अब तक की सबसे बड़ी तैनाती तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत में भारी इजाफा किया है। लगभग 2,500 मरीन सैनिकों को खाड़ी क्षेत्र में तैनात किया गया है, जो पिछले दो दशकों में अमेरिका की सबसे बड़ी तैनाती है। इसके साथ ही, 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के 1,000 पैराट्रूपर्स को भी मोर्चे पर भेजा जा रहा है, जो दुश्मन के इलाकों में घुसकर सामरिक ठिकानों पर कब्जा करने में सक्षम हैं।

ईरान का पलटवार और 3000 से अधिक मौतें अमेरिका और इजराइल लगातार ईरान के ठिकानों पर हवाई हमले कर रहे हैं। अमेरिकी दावों के मुताबिक, उन्होंने अब तक ईरान के 11,000 से अधिक ठिकानों को तबाह किया है। वहीं, ईरान भी चुप नहीं बैठा है। रविवार को ईरान ने इजराइल पर दर्जनों मिसाइलें दागीं। इस भीषण संघर्ष में अब तक 3,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

यूनिवर्सिटी पर हमले की चेतावनी, बढ़ गया तनाव ईरान ने अब इस युद्ध को शिक्षण संस्थानों तक फैलाने की धमकी दी है। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि यदि इजराइली हमलों में ईरानी विश्वविद्यालयों को निशाना बनाया जाना बंद नहीं हुआ, तो क्षेत्र में स्थित अमेरिकी और इजराइली यूनिवर्सिटी परिसरों को सीधे तौर पर निशाना बनाया जाएगा।

अमेरिका को 30 मार्च की डेडलाइन ईरान ने अमेरिका को एक अल्टीमेटम दिया है। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने सोमवार, 30 मार्च दोपहर 12 बजे तक का समय दिया है। ईरान की मांग है कि अमेरिका आधिकारिक तौर पर ईरानी विश्वविद्यालयों पर हो रहे हमलों की निंदा करे और इजराइल को इन शोध केंद्रों को निशाना बनाने से रोके।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहराता संकट 28 फरवरी से शुरू हुई यह जंग एक महीने बाद भी जारी है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के नियंत्रण ने तेल और गैस की आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। युद्ध के कारण उर्वरक संकट और ठप पड़ी हवाई यात्राओं ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।

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