इन 2 अफसरों को कभी मत भूलना : ईरान ने मिनाब स्कूल हमले के लिए अमेरिकी नेवी अधिकारियों को किया बेनकाब
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मिनाब हमले का सच 28 फरवरी की वह काली तारीख ईरान के मिनाब शहर के लिए कभी न मिटने वाला जख्म बन गई है। मिनाब के शजरेह तैयबा गर्ल्स स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में 170 से अधिक मासूम बच्चों और शिक्षकों की जान चली गई। अब ईरान ने इस त्रासदी के लिए सीधे तौर पर अमेरिकी नेवी के दो उच्च अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए उनकी तस्वीरें सार्वजनिक कर दी हैं।

कौन हैं ये दो अधिकारी? ईरान के आधिकारिक राजनयिक हैंडल से जारी जानकारी के अनुसार, इन दो अधिकारियों के नाम ली आर. टेट (Leigh R. Tate) और जेफरी ई. यॉर्क (Jeffrey E. York) हैं। ये दोनों यूएसएस स्प्रुअंस (USS Spruance) जहाज पर तैनात थे। ईरान का आरोप है कि कमांडिंग ऑफिसर टेट और एग्जीक्यूटिव ऑफिसर यॉर्क ने ही तीन बार टॉमहॉक मिसाइलें दागने का आदेश दिया था, जिसने स्कूल को मलबे में तब्दील कर दिया।

ईरान का आरोप: यह कोई भूल नहीं, नरसंहार है संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 58वें सत्र में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया। ईरान का तर्क है कि अमेरिका जैसे तकनीकी रूप से उन्नत देश से गलती की संभावना न के बराबर है। ईरान का दावा है कि यह हमला पूरी तरह से सुनियोजित था और मासूमों को निशाना बनाया गया।

अमेरिकी मिलिट्री का तर्क: डेटा की बड़ी चूक दूसरी ओर, अमेरिकी सैन्य जांच में इसे एक गंभीर चूक बताया गया है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, निशाना पास का एक सैन्य बेस था, लेकिन पुराने मैप और डेटा का इस्तेमाल करने के कारण मिसाइलें स्कूल पर जा गिरीं। पेंटागन अब इस बात की जांच कर रहा है कि बिना उचित वेरिफिकेशन के स्ट्राइक का आदेश किसने और किन परिस्थितियों में दिया।

बढ़ता वैश्विक दबाव और कूटनीतिक संकट इस घटना ने मिडिल ईस्ट में पहले से चल रहे तनाव को और भड़का दिया है। चीन और क्यूबा जैसे देशों ने इस मामले की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि वे जांच के आधिकारिक नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने इस हमले के लिए सीधे अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है।

न्याय की गुहार मिनाब में अपने दो बच्चों को खोने वाली मोहद्देसे फलाहत जैसे कई पीड़ित परिवार अब न्याय के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर देख रहे हैं। एक तरफ जहां युद्ध की विभीषिका में मानवीय संकट गहराता जा रहा है, वहीं इन 170 चेहरों की मौत ने विश्व पटल पर युद्ध के नियमों और नैतिकता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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